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नगदी के नाम पर उधारी कुछ ज्यादा है
यारी के नाम पर मक्कारी कुछ ज्यादा है।
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साहित्य मे भी होने लगे है घपले-घोटाले
कविता के नाम पर कलाकारी कुछ ज्यादा है।
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वो डिजिटल इंडिया का कर रहे है वादा
पर देश-प्रदेश मे बेरोजगारी कुछ ज्यादा है।
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वो करके वारदात बच के निकल जाते है
गुंडो को संरक्षण सरकारी कुछ ज्यादा है।
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चोर उच्चके भी हाथ जोडे दिख रहे है
आजकल चुनाव की तैयारी कुछ ज्यादा है।
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बहुतो को आपत्ति है मेरी कलम से मगर
सच से अपनी यारो,यारी कुछ ज्यादा है।
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#संजय अश्क बालाघाटी
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