पुनर्जन्म आधारित कुछ फिल्में

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edris
दोस्तो भारत मे फ़िल्म बनाने के विषयों में एक विषय पुनर्जन्म भी रोचक रहा है क्योंकि इस विषय मे बड़ी जिज्ञासा होती है एक किरदार की पिछली ज़िन्दगी से वर्तमान ज़िन्दगी को जोड़ना और फिर उस इंसान को पिछले जन्म का याद आना उसके बाद पीछले जीवन के अधूरे काम जिसके कारण उस इंसान का पुनर्जन्म होना ये बड़ी रोचकता के साथ जिज्ञासा भरा होता है,, तो भारतीय सनातन पुराण भी इस तरह के पुनर्जन्म की पृष्ठी करते है तो दर्शको की जिज्ञासा, रूझान के साथ आस्था भी जुड़ जाती है
वेसे असल जीवन मे भी पुनर्जन्म के कई अकाट्य सबूतों के साथ उदाहरण मील है जिससे यह पुनर्जन्मआस्था और प्रबल हो जाती, साथ ही वेदों पुराणों में मिलता है कि शरीर नश्वर है, आत्मा अजर अमर होती है
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लेकिन पुनर्जन्म आधारित विषय फिल्मे सफलता की गारंटी हो ज़रूरी नही होता है
फिर भी मेरे कुछ पाठकों ने मुझे संदेशे भेजे की पुनर्जन्म आधारित फिल्मो पर कुछ जानकारी दीजिये
तो साथियो इसकी भारतीय सिनेमा में  आधी सदी पहले ही शूरूआत हो गई थी
महल, 1949,
अशोक कुमार, मधुबाला, कनु रॉय,
निर्देशक कमाल अमरोही
शंकर एक हवेली में जाता है तो पता चलता है यहां एक प्रेम कहानी का दुःखद अंत हुआ था, और वह खुद को उस कहानी में पाता हैं, एक महिला से मुलाकात होती है जो उसकी प्रेमिका होने का दावा करती है,
मधुमती, 1958
दिलीप कुमार,वैजयंती माला, प्राण, जयंत, जॉनी वॉकर,
निर्देशक विमल रॉय
रेलवे स्टेशन जाते समय देवेंद्र भूस्खलन में कही फंस जाता है, वह एक मकान में शरण लेता है जो जाना पहचाना लगता है, फिर उसे पता चलता है कि यह उसका पुनर्जन्म है,,, फिर परत दर परत पीछले जन्म की बाते खुलती है, सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का फ़िल्म फेयर आवर्ड भी मिला था,
मिलन, 1967
सुनील दत्त, नूतन, प्राण, देवें वर्मा
निर्देशक – अदुर्थी सुब्बा रॉव
एक नाविक गोपी, और अमीर राधा का प्रेम हो जाता है, राधा विधवा होती है तो दोनों के सम्बन्धो को अवैध करार दिया जता है, दुखद घटना घटती है दोनो का पुनर्जन्म होता है
सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मफेयर संगीतकार का पुरुस्कार फ़िल्म को मिला था
महबूबा, 1976,
राजेश खन्ना, हेमा मालिनी, शक्ति सामंत, असरानी, प्रेम चोपड़ा, मदन पूरी
निर्देशक – शक्ति सामंत
सुरज अंधी तूफान में फस कर एक गेस्ट हाउस में पहुचता है, जहां वह पहली बार आया है, लेकिन वह महसूस करता है कि वह यहां पहले या चुका था, फिर पुनर्जन्म का रहस्य खुलते हैं,
कुदरत, 1981,
राजेश खन्ना, हेमा मालिनी, राजकुमार, विनोद खन्ना, प्रिया राजवंश
निर्देशक – चेतन आनन्द
चन्द्रमुखी शिमला जाती है, उसे वहाँ हर जगह देखी भाली लगती है, उसे ज्ञात होता है कि वह पारो का पुनर्जन्म है, अपने अतीत के कातिलो को सज़ा दिलाती है,
सर्वश्रेष्ठ कहानी के लिए फ़िल्म फेयर सम्मान
प्रेम, 1995
संजय कपूर, तब्बू, अमरीश पुरी
निर्देशक – सतीश कौशिक
संजय को बार बार पिछले जन्म की घटनाएं याद आती रहती है, जिस पिछले जन्म में वह शांतनु था, उसका और लाछी का प्रेम असफल हो गया था, जो कि इस जन्म में मुकम्मल होता है, फ़िल्म फ्लॉप की श्रेणी में आती है लेकिन इस का जिक्र के बिना यह फेहरिस्त अधूरी लगती
करण अर्जुन, 1995,
सलमान, शाहरुख, रखी, काजोल, ममता, अमरीश
निर्देशक- राकेश रोशन
मेरे करण अर्जुन आएगे, तो एक अभागी माँ को इंसाफ दिलाने के लिए करण अर्जुन पुनर्जन्म लेकर आ जाते है, अपनी माँ को इंसाफ दिलाते है, ब्लॉक बस्टर हिट फिल्म हमेशा, 1997
सैफ अली, काजोल, आदित्य पंचोली,
निर्देशक- संजय गुप्ता
यश, राजा और रानी बचपन के दोस्त है, राजा, रानी को प्यार हो जाता है, यश उनका कत्ल करवा देता है, 20 साल बाद राजा और रानी फिर जन्म लेकर आ जाते हे, यश से अपने पिछले जनम की मौत का बदला लेते है
ओम शांति ओम, 2007,
शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण, श्रेयस तलपड़े, किरण खैर, अर्जुन रामपाल
निर्देशक- फरहा खान
ओम एक जूनियर आर्टिस्ट है, उसे बड़ी सुपर स्टार अदाकारा शांति से मुहब्बत हो जाती है लेकिन शांति को मुकेश आग के हवाले कर देता है,आग से बचाने में ओम को जान गवानी पड़ती है, 30 साल बाद ओम और शांति का पुनर्जन्म होता है, दोनो मिलकर पीछले जन्म के कातिल से बदला लेते है,
मघधीरा,2009
तेलगू भाषी दक्षिण भारतीय फ़िल्म
राम चरण तेजा, काजल अग्रवाल, श्रीहरि, देव गिल
निर्देशक- एस एस राजमौली
इंदु के पिता की हत्या का आरोप हर्ष पर लगाया जाता है उसे अगवा कर लिया जाता है, अब हर्ष और इंदु की लगातार मुलाकात होती जाती है, हर्ष और इंदु को पिछले जन्म की बाते याद आती जाती है, इस फ़िल्म में एक या दो नही चार चार पुनर्जन्म किरदार पेश किये गए थे फ़िल्म ब्लॉक बस्टर फ़िल्म थी जो न केवल तेलगू वरन हिंदी डब में भी खूब सराही गई थी, फ़िल्म के vfx, एनिमेशन, एक्शन दृश्य लाजवाब थे
ईगा-मक्खी, 2012
तेलगू भाषी दक्षिण भारतीय फ़िल्म
सामंथा प्रभु, नानी, सुदीप,
निर्देशक- एस एस राजमौली, सत्यनारायण
नानी, बिंदु एक दूसरे से प्यार करते है, सुदीप बिंदु के प्रति आकृषित है तो वह नानी की हत्या करवा देता है, नानी पुर्नजन्म लेकर मक्खी के रूप में वापस आ जाता है, अब बिंदु और नानी सुदीप का जीना दुश्वार कर देते है, फिर नानी अपनी मौत का बदला लेकर ही शांत होता है, फ़िल्म हिंदी में मक्खी नाम से प्रदर्शित हुई थी
दोस्तो आलेख की सीमाए होती है,इसलिए
कुछ फिल्मो को फेहरिस्त में शामिल नही किया जैसे जानी दुश्मन-2002, जनम जनम-1988, तेरी मेरी कहानी-2012, मिर्जिया-2016, कर्ज-1980-2008, मिस्टर एन्ड मिस-2005, डेंजरस इश्क-2012, अब के बरस-2002, राब्ता-2017,,,
आप के कमेंट्स हमे ऊर्जा देते है अच्छा और बेहतर लिखने की,
एक खास बात
इस विषय पर मेरे फेसबुक दोस्तो की बड़ी मदद मिली उनका तहेदिल से शुक्रिया

#इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| इनका परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।