ख़त भी जला के देखे..

Read Time3Seconds

subhash
यादों को तेरी दिल से ऐसे मिटा रहे हैं,
लिख-लिख के नाम तेरा अपना बता रहे हैं।

ख़त भी जला के देखे,यादें गईं न दिल से,
तस्वीरें जो थीं तेरी, वो भी जला रहे हैं।

जिस दिल में याद ज़ालिम तेरी बसी है अब तक,
उस दिल में अपने हाथों नश्तर चुभा रहे हैं।

यारों का क्या भरोसा रुसवा तुझे न कर दें,
यह सोचकर के तेरी दुनियां से जा रहे हैं।

तीरे ज़फ़ा से घायल आशिक मिले हैं जो भी,
अपनी वफ़ा का वो सब मातम मना रहे हैं।

जाकर ज़रा-सा ‘राहत’ देखो तो मयकदे में,
कुछ लोग जलती यादें पीकर बुझा रहे हैं।

परिचय : सुभाष रावत का जन्म १९६१ में मुरादाबाद में हुआ है। आप यहीं के मूल निवासी हैं। शिक्षा मुरादाबाद से ही ली है। आप साहित्यिक योगदान में ग़ज़ल,क़ता, मुक्तक और गीत आदि रचते हैं। आपका साहित्यिक उपनाम ‘राहत बरेलवी’ है। देहली द्वारा आपको ‘ग़ज़ल रत्न’ सम्मान सहित रामपुर द्वारा ‘राष्ट्र सचेतक’ सम्मान और कई मंचों द्वारा प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया है। ग़ज़ल कुंभ 2017(दिल्ली) में शामिल हुए हैं। हिन्दी साहित्य को बरेली जनपद के साहित्यकारों के साथ अनेक कवि गोष्ठियों में पहुँचाने में सक्रिय योगदान है। काव्योदय साँझा संग्रह, आगाज़-ए-शायरी के साँझा संग्रह में ग़ज़लों और राष्ट्रीय पत्रिकाओं में आपकी रचनाओं प्रकाशन होता है। वर्तमान में आप जलसन्धान मंत्रालय के केन्द्रीय भूजल विभाग में कार्यालय अधीक्षक के पद पर आसीन हैं।आप बरेली(उ.प्र.)में रहते हैं। 

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

वो रास्ता

Thu Apr 6 , 2017
जिस रास्ते से गुजरती थी वो, वो रास्ता मुझे उसकी याद दिलाता है.. जब भी गुजरता हूं उस रास्ते से, तो उसका चेहरा मेरी आँखों में आता हैl ऐसा लगता है जैसे हम उसके साथ चल रहे हैं, उस वक़्त जो न कह सके थे वो आज कह रहे हैं.. […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।