नायक

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aasha amit nashine
नव पल्लव जैसे खिलते है,, तुम लेती हो अँगडाई।
गंध  तुम्हारे अंग अंग  से, लेकर बहती  पुरुवाई।
नैन  कटीले कजरारे प्रिय  ,,, नित बसते है चेतन में।
क्षण भर का परिरंभ तुम्हारा,अमृत जैसे मरूवन में।
वृत्तपुष्प मकरंद अधर द्वय,  ग्रीवा लगे सुराही  है।
कुंतल स्याह घनेरे बादल ,, राह भटकता राही है।
पूनम के चँदा सी छवि है,,ऋतुओं की रंगत पाई।
गंध  तुम्हारे अंग अंग  से, लेकर बहती  पुरुवाई।
रक्तसिक्त कोमल कपोल हैं,, मुख मंडल आभा प्यारी।
देह नर्म  साँसों की गर्मी,,  हृदय  ग्रंथि खोले सारी।
प्रेम सुधा  कण कण से रिसती,,प्रीति सिंधु जैसी गहरी ।
हद से अनहद तक बिखरी हो,, वाणी वेदों सी ठहरी।
हीरे मोती भी झरते जब  ,,मुक्त गगन सम मुस्काई।
गंध  तुम्हारे  अंग अंग  से,   लेकर बहती  पुरुवाई।
नायिका**
नेहसिक्त नजरें प्रियतम की,, यौवन पर सध जाती हैं।
महक रातरानी सी तन की,,  खुशबू को बिखराती है।
रूप नहीं मेरा अनुपम पर,,  प्रेम पिया का अद्भुत है।
बिना प्रीति के मधु भी कड़वी,, देह मखमली भी बुत है।
है अनुराग अनोखा मनहर ,अति भावों में गहराई।
गंध  तुम्हारे अंग अंग  से,  लेकर  बहती  पुरुवाई।
#आशा_अमित_नशीने
 
परिचय-आशा अमित नशीने 
W/o अमित नशीने 
शिक्षा-बी.  एस. सी.
          एम. ए.(इंगलिश)
           पी. जी. डी. सी. ए.
पता-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)

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