*जन्मदिवस*

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 babulal sharma
.       🌼🌹🌼
सहज कार्य, प्रीत सजल है,
नर्मद सम् पावन दृगजल हैं।
प्रेम  प्रीत  का पावन झरना,
नेह स्नेह अभिलाष सरल है,
करबद्ध जन्मदिन कहना है।
अपनी प्रिय पावन बहना है।🌼

जीवन सुरभित चंदन जैसा,
मैना  कोयल  जैसा स्वर है।
वर्ण सुवर्ण,भाव  भी  उत्तम,
मीन से अक्षि सौम्य सुघर है।
साहित्य जगत का गहना है।
अपनी प्रिय पावन बहना है।🌼

29  नवम्बर  जन्म  दिवस,
अभिलेखों सन् सत्य विवश।
लिखित सत्य बाकी है झूठा,
जन्मदिवस बस जन्मदिवस।
अभिलेखों से सब चलना है,
अपनी प्रिय पावन बहना है।🌼

कवि हित के अनुबन्धों की,
उस मूरत का सम्मान करूं।
जीवन बने  और सद प्रेरक,
जन्म दिवस पर मान करूं।
अजस्र  स्नेह  का  झरना है,
अपनी प्रिय पावन बहना है।🌼

पी के एस समूह का गौरव,
वेद *ऋचा* शुभ नाम  करूँ।
कदम कदम खुश हाली हो,
जन्मदिवस शुभकाम करूं।
इनका सम्मान हमें करना है,
अपनी प्रिय पावन बहना है।🌼

सबके हित में अपने हित है,
“सद्विचार”  संवाहक  भी है।
हिन्दीसाहित्,सृजन कर्मरत,
कवि जन से संवादक भी है।
हिन्दी शिक्षा  बाना पहना है,
अपनी प्रिय पावन बहना है।🌼

दीर्घ आयु की करूं कामना,
शुभ  शुभ मैं अरदास लिखूं।
निज की पर की करें उन्नति,
जन्म दिवस  पर मान लिखूं।
हरिचरणकमल शुभरचना है,
अपनी प्रिय पावन बहना है।🌼

मुझपर इनकी प्रीत बहुत है,
मुझसे,बोलें किस से कम है।
मेरे को खुशियों की तिजोरी,
पर बोलो किसको ये कम है।
माँ गंगे सा सम रस बहना है,
अपनी प्रिय पावन बहना है।🌼

मीरा की ऋचा पर छाँया है,
कुछ महा देवी की माया है।
सुभद्रा का वरद्हस्त मानो,
माँ,वीणापाणि की जाया है।
करबद्ध मेरा बस कहना है,
अपनी प्रिय पावन बहना है।🌼

शबरी जैसी पावन भक्ति है,
पारशवी सी भोली  प्रीति है।
अनुसुइया सी माने विद्वानी,
भली निभाई सुगम  रीति है।
नित काव्यभक्तिरत रहना है,
अपनी प्रिय पावन बहना है।🌼

जाने कैसे ये अवसर आए,
आपके दर्शन हम पा जाए।
नेह स्नेह बस रखना बहना,
ईश्वर ही शुभ संयोग बनाए।
जन्मी  यह  शुभ  महिना है,
अपनी प्रिय पावन बहिना है।🌼
🌼🌹जन्म🌼🌹🌻🌼
🌻🌹🌻🌼🌹🌻🌼
🌼🌹🌼दिवस🌻🌹🌼
🌹🌻🌼🌹🌻🌼🌼
🌼🌹मुबारक🌼🌹🌼
👏👏👏👏👏👏🌹
🌹🌹हो🌹🌹🌹🌹
🙏🙏डाँ.ऋचे🙏🙏🌼🌻
🌴🌹🌼🌻🌴🌹🌼
🌼🌻🌴 जी 🌹🌼🌻
ऋचा बड़ा शुभ नाम है,हरियाणा शुभवास।
हिन्दी बिन्दी सम रखे ,साहित करे उजास।।
🙆‍♀
करनाल शहर में बसती हो,
यूँ सत साहित में रमती हो।
प्रिय लगती पटल दुलारी सी,
हम सब के साथ विहँसती हो।
👍
तुम दिल से भी जिज्ञासु हो,
हिन्दी हित  कवि आशु हो।
बिटिया बहिना सबकी प्रिय,
तुम सच में ज्ञान पिपासु हो।
🙌
अपनत्व मुझे लगता इतना,
मालूम नहीं क्यों है कितना।
मेरी भी है इक ऐसी बेटी,
उससे नेह स्नेह है जितना।।

और लिखूँ तो अति होती है।
समय चक्र की गति होती है,
कोई छोर नहीं है लिखने का
साहित्यिक प्रगति  होती है।
🌼

नाम– बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।