मौन है मानवता

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arpan jain

मस्तकों के झुन्ड आज मौन है
लगा शायद संवेदना भी गौण है
लड़ रही थी वो अकेली नग्न तन
मानों वसुंधरा की देह सारी कट गई

हाँ !
न बची कोई वेदना किसी स्त्री में,
न पुरुष बचे न बची कोई नारियाँ
कटघरें में अकेली खड़ी थी इंसानियत
मानों पहाड़ कट कर औंधे पड़े थे

बुद्ध की धरती पर नंगानाच था
शांति का हरकारा मानो सो गया
चुपचाप तमाशा देख लिया सबने
वो अकेली देह को दाग रही होगी

खैर,
कितनी अमानुषता घर कर चुकी
जानवर भी खुद रहे होंगे गर्वित
इंसान भूल गया प्रकृति इंसान की
हैवान दैत्य सब रहे होंगे कौन

बस करो बंद करो ये नाच नंगा
तोड़ दो सारे आईने घर के तुम्हारे
कितना संवारोगे रोज चेहरे को
आत्मा के दाग को कैसे निहारोगे?

लग चुका है कोयला पुरुष होने पर
बिन अदालत सब फैसले तुम करोगे?
काश तुम्हारी बहन-बेटी या होती पत्नी
फिर तुम्हारी मर्दानगी कहाँ समाती?

देखता जमाना भी तमाशा तुम्हारी बहन-बेटियों का
तब नजाकत सी छुअन में इंसानियत दफन होती
खरीदता तुम्हारी माँ बहन को कोई दलाल,
तब भी उलाहना की दलीलें होती तुम्हारी

मौन होकर लूटते देखते अस्मत तुम
तब भी शायद तुम वही निष्ठुर ही रहते
रो रही होती फिर स्त्री और उसकी संवेदना
रो रहा होता स्वर्ग का देवता अकेले-अकेले

#डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’

परिचय : डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर  साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।

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tarkesh ojha

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।