मेरी सांसें किधर..

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chatrapal

तिनका तिनका बिखर गई हैं,
मेरी सांसें किधर गई हैं।

पीछे-पीछे भागा दौड़ा,
आगे-आगे जिधर गई हैं।

दुनिया के मेले में ढूँढा,
उधर गई या इधर गई हैं।

खतरा कतरा-कतरा आया,
मुस्कानें भी बिफर गई हैं।

मानवता मकड़ी जाले में,
सच को दीमक कुतर गई है।

नोटों का बंडल जो उछला,
आज गवाही मुकर गई है।

बूँदों-सी ये बढ़ती उलझन,
सुलझन डरकर सिहर गई है।

माँ के कदमों को छूते ही,
सब चिन्ताएं सुधर गई हैं।

ममता का जो साया पाया,
अपनी काया निखर गई है।

लिखते-लिखते रुक गए तो,
ग़ज़ल ‘शिवाजी’ ठहर गई है।

                                                     #छत्रपाल

परिचय :  छत्रपाल शिवाजी भोलेनाथ के अनन्य भक्त कवि हैं। आप सागवाडा के जिला डूँगरपुर (राजस्थान) में रहते हैं।

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matruadmin

2 thoughts on “मेरी सांसें किधर..

  1. नैतिक पतन के दौर में संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार पर प्रहार करती सुन्दर रचना।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।