कॉर्पोरेट खेमे के प्रखर पब्लिक इंटेलेक्चुअल प्रताप भानु मेहता की अशोका यूनिवर्सिटी से मोदी के इशारे पर हुयी छुट्टी को मशहूर स्तंभकार तवलीन सिंह के अपमानित होकर मोदी कैंप से बाहर किये जाने के प्रसंग से भी समझा जा सकता है| तवलीन सिंह की कॉर्पोरेट लेखनी मोदी के समर्थन में […]

वर्तमान में जीवन के अनेक आयाम सामने आने लगे हैं। दैहिक बीमारियों का दावानल एक बार फिर अपना प्रकोप दिखाने लगा है। अनेक देशों सहित हमारे राष्ट्र में भी निरंतर विस्तार ले रहा है। सभी सरकारें अपने स्तर पर फिर से तैयारियों में जुट गई हैं। सावधानियां बरतने की अनुशासनात्मक […]

पीढ़ियों का अंतर तो हर दौर में रहा है, बुज़ुर्ग और युवा पीढ़ी के बीच संवाद की कमी हमेशा ही रही है, फिर आज के वृद्ध ख़ुद को अधिक उपेक्षित क्यों महसूस करते हैं? कारण है, उनका भावी पीढ़ी से संवाद भी कम या लगभग ख़त्म हो गया है। महज़ […]

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत याचिका क्रमांक WPWIVIL/203/2015 में यह निराकरण चाहा गया था कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३२ के अंतर्गत संविधान में संशोधन कर ‘इण्डिया’ शब्द को हटाकर सिर्फ ‘भारत’ रखा जाए। याचिका की सुनवाई तीन सदस्यीय खण्डपीठ जिसमें माननीय मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबड़े,न्यायमूर्ति ए. एस.बोपन्ना […]

सेनेटाइजेशन 2020 में हमारे लिए नया शब्द नही रहा। लगभग बच्चे बच्चे के होठों पर यह शब्द आ चुका था। तो क्या सेनेटाइजेशन को लेकर हम पहले जागरूक नही थे ? नही। यह सोचना बिल्कुल भी गलत होगा। क्योंकि शुद्धिकरण का विचार हमारे सन्तों व पूर्वजों का सदैव से रहा। […]

देश की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने का दावा करने वाली सरकारों ने नागरिकों के विश्वास को ठगने का हमेशा से ही प्रयास किया है। गुलामी के लम्बे काल ने स्वाधीनता के मायने कहीं गुम कर दिये हैं। लोग स्वतंत्रता और वास्तविक स्वतंत्रता में अंतर करना भूल गये हैं। थोपी गई […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।