Archives for लघुकथा - Page 6

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‘एहसास’

  सुनिधि को ऑफिस जाते समय बाजार के सामने से होकर गुजरना होता है। सामान्य महिला की ही तरह वह भी मेनीक्वीन पर टंगे हुए नित नए-नए परिधानों को निहार…
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पश्चाताप(लघुकथा)

नारंग साहब के घर कन्या भोज चल रहा था। छोटी-छोटी कन्याओं को प्रेमपूर्वक भोजन करवाकर उनके पैर पूजे जा रहे थे। तभी मैं भी अपनी बेटियों के साथ वहाँ पहुंची।…
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‘सिस्टम’

महानगर का प्रत्येक चौराहा व्यस्त, लाईटों से नियंत्रित ट्रेफिक ...जैसे ही रेड लाईट होती है,एक साइड की गाड़ियों में ब्रेक लग जाते..तकनीकी ने मनुष्य को यांत्रिक बना दिया है,जिसे लोग…
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क्यों ?(लघु कथा )

अमन और फारूख दोस्त थे। दोनों अलग-अलग सरकारी विभागों में अफसर थे। उनके ऑफिस एक ही बिल्डिंग में अलग-अलग फ्लोर पर थे,पर लंच के समय कैंटीन में रोज मिलते और…
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लघुकथा

पछतावा…सरकारी नौकरी ही क्यों माँ ?

आज 'वेलेन्टाईन डे' है यार,कोई मस्त लव स्टोरी सुना..अरे!कहाँ खोई है अंकिता? बोल न कुछ,चल बता क्या हुआ ? अंकिता ने कहा-'कुछ नहीं रिया, मैं ठीक हूँ। रिया-'देख ! अंकिता,तू…
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पेंटिंग

विजयानंद विजय ट्रेन का एसी कोच -- जिसमें आम तौर पर सम्पन्न लोग ही यात्रा करते हैं।आमजनों के लिए तो यह शीशे-परदे और बंद दरवाजों के अंदर की वो रहस्यमयी…
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