Archives for काव्यभाषा - Page 3

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 अघोरी

शिव ही शिव हैं जिसके अंदर जानें जो शिव-माया का अंतर। प्रेम शिव से करता है शिव पर ही वो मरता है। शिव हैं उसकी श्वांसों में शिव उसकी प्रश्वासों…
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सम्भावना

थामे रखनी है अपने हाथों मे एक मशाल ताकि गुजर सकें वक्त-बेवक्त अकेले अन्धी सुरंगो से होकर बेखौफ़. षडयंत्रो से परिचित हो कर भी दिख सके निश्चिंत बना कर रखनी…
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उम्र भर सवालों में उलझते रहे

उम्र भर सवालों में उलझते रहे, स्नेह के स्पर्श को तरसते रहे फिर भी सुकूँ दे जाती हैं तन्हाईयाँ आख़िर किश्तोंमें हँसते रहे आँखों में मौजूद शर्म से पानी, बेमतलब…
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फितरत 

वे जब होते हैं प्रसन्न या अति प्रसन्न , तो लगता है जैसे - रख देंगे लाकर , कदमों में आपके आसमाँ भी और जब होते हैं अप्रसन्न तो लगता…
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परम पूजनीया गणिनी आर्यिका विशुद्धमती माताजी के पावन चरणों में भावों की स्वर्णिम माला 

१ दैवीय है -- आपका स्वरूप २पूजनीय है---आपके चरण ३ करणीय है--आपकी पूजा ४ लेखनीय है -आपका चरित्र ५ माननीय है -आपकी मृदुता ६ मोहनीय है---आपकी ममता ७ दर्शनीय है--…
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