Archives for काव्यभाषा - Page 3

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मोनालिसा

बचपन में साथ खेलना,और एक दिन तुमसे यह कह देना कि जाओ अब मैं तुम संग नहीं खेलती माँ ने कह दिया था बच्ची अब बड़ी हो गई ना चाहकर…
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ज्ञान दायिनी

शुभ्र ज्योति आभामयी खोल ज्ञार के द्वार। बिना तुम्हारे स्नेह के ये लघु जीवन भार।। करतल वीणाधारिणी नेहवारिणी अम्ब। सृजक सुपुस्तकधारिणी मनःविहारिणि अम्ब।। ज्ञानालोक प्रकाशिनी मन्दहासिनी अम्ब। विकट व्यथा संहारिणी…
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“एक कविता ऐसी भी”

एक कविता ऐसी लिखूँगी पढ़कर सारे रो देंगे। जीवन का कटु सत्य लिखूँगी अपना आपा खो देंगे। पिंजरे की बुलबुल तो उड़ गई मैं घर- तज कित जाऊँगी। साथी की…
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मेरा देश बदल रहा है………………….

मेरा देश बदल रहा है ! कहाँ थे हम कहाँ जा रहे है, बस अंधी दौड़ में भागे जा रहे हैं, तरक्की है कोई या फिर भेष  बदल रहा है, क्या…
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हिंदी

हर तरफ़ हिंदी का ही गुणगान है! देश की मेरे यही पहचान है!! ये बड़ी उत्तम गुणी जन मानते! लेखनी में फूंक देती जान है!! नेक दिल बन सब शरण…
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मेरी अपनी सोच

जिसे निभा न सकूँ,/ ऐसा वादा नही करता..! मैं बातें अपनी हद से, ज्यादा नहीं करता../१/ तमन्ना रखता हूं / आसमान छू लेने की../ लेकिन औरो को गिराने का /…
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