वाह रे सियासत सत्ता की छांव में सब कुछ संभव है सत्ता की हनक के नीचे बड़े-बड़े अधिकारी मूक-दर्शक मात्र बनकर रह जाते हैं। यह एक ऐसा सत्य है जोकि जग जाहिर है। समय-समय पर ऐसा सदैव ही देखा गया है। कभी वही प्रशासन बहुत ही तेज तर्रार रूप रेखा […]

साहित्य अकादमी के पुरस्कार पाने की होड़ एक और संविधान की अष्टम अनुसूची में स्थान पाने की होड़ का रूप ले रही है तो दूसरी ओर कुछ बोलियाँ साहित्य अकादमी की मान्यता के आधार पर अष्टम अनुसूची में स्थान पाना चाहती हैं। इस प्रकार संघ की राजभाषा हिंदी सहित भविष्य […]

आज तो हर संचार मीडिया पर मां ही तो छाई है, तो फिर वो वृद्ध आश्रम में किसकी मां आई है, आज नारी का शोषण करने वाले ही मां को मानने वाले है नारी को वासना की निगाहों से ताड़ने वाले वो औरत भी तो किसी की बहिन या माई […]

मां कोटि कोटि तुझे प्रणाम, करते तुझे हम सुबह शाम। मां सर पर रहे तेरा सदा साथ, कभी न छूटे तेरा हमसे साथ। तुम दुनिया की रखवाली हो, बिगड़े काम बनाने वाली हो। करे याद तुझे हम सुबह शाम। मां कोटि कोटि तुझे है प्रणाम।। मन में न आये कोई […]

आगर के उत्तर बसे,बैजनाथ भगवान। मनोकाम पूरण करें, सदा संवारे काम।। ऊपर मंगलनाथ है,खेड़ापति के पास।। मोपे किरपा कीजिये,एक तुम्हारी आस।। रत्ना मोती सुंदर सागर। धन्य भूमी है माता आगर।।१ मध्यदेश की थी रजधानी। नवम सदी इतिहास बखानी।।२ अचलेश्वर मां तुला भवानी। भेरु केवड़ सबके स्वामी।।३ जय जय बैजनाथ भगवाना। […]

ना देर लगाओ मां ,अब आ भी जाओ मां। बेटी तेरी पुकारे, कब से खड़ी है द्वारे। आ जाओ मां…. हैं आंखों में अंगारे , जग ने दिए सारे। कुछ घाव हैं गहरे,अपनों ने किए सारे। दर्द मिटाओ मां ,अब आ भी जाओ मां। ना देर लगाओ मां ,अब आ […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।