Author Archives: matruadmin - Page 3

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कविता

जो शेष बच गया शून्य नहीं था ,प्यार था.. जीवन शान्त कोलाहल का एक ज्वार था दुख की सीमा सन्तापों में सुख के अप्रतिम प्रलापो में शब्दो से विचलित भावो…
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मा. प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षता में आयोजित 31वीं केंद्रीय हिंदी समिति की बैठक में हुई वार्ता।

केन्द्रीय हिन्दी समिति की 31वीं बैठक 6-09-2018 को माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में उन्हीं के निवास पर संपन्न हुई। इस बैठक में गृह मंत्री श्री…
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मानवता की खिल्ली को

(भूख से मरी वो दोनों बच्चियां मुझे सोने नहीं दे रहीं रोज रात को आकर वो मुझसे खाना मांगती हैं रोटी दिखाते ही वो हँसकर लौट जाती हैं । अगर…
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अकर्मण्यता

ये तुम्हारी जड़ता तुम्हारी अकर्मण्यता एक दिन उत्तरदायी होंगी तुम्हारे ह्रास का और कठघरे में खड़ी होंगी और जवाब देंगी सृष्टि के विनाश का परिस्थतियाँ खुद नहीं बदल जाती हैं…
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कुधर नकलची

इधर नकलची उधर नकलची, नहीं हैं बोलो किधर नकलची? कवि ख़ुद को वह लिखते लेकिन, हैं सचमुच वे कुधर नकलची मंचों पर सम्मान मिले तो, हँसें खोलकर अधर नकलची! बड़े-बड़े…
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दिल

दिल तुझ पे हम अपना हार बैठे। सागर में कसती..... उतार बैठे। हसरतों को दी जब उड़ान हम ने। सारी हदें हम अपनी  भुला बैठे। मिलता है प्यार नसीबों से…
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