Author Archives: matruadmin - Page 133

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तेरा हर व्यवहार हूँ मैं

मैं तुझ आत्मा का कौन हूँ! पल-पल का साथी, तेरा हर व्यवहार हूँ मैं। तेरे सब रिश्ते-नातों  का सात्विक सार हूँ मैं, तुझमें ही रचा-बसा,घुला-मिला तुझसे भी पार हूँ मैं।…
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बौद्धिक सोच

जानती हूं मैं नारी हूं, आदेश था बस सुन सकती। बरसों से यूं सुनती रही, अब बहुत कुछ कह सकती। चूंकि आज सतयुग है नहीं, मैं सीता नहीं बन सकती।…
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मेरी माँ

अपने दुःखों को हमेशा, मुझसे छुपाती है मेरी माँ। मेरे लिए अनेक, कष्ट उठाती है मेरी माँ। मेरी नादान हरकतों पर, पड़ोसी बार-बार उलाहने देते, करके मेरी ही वकालत, मेरी…
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शिक्षण एक सुकर्म

शिक्षण है कर्म मेरा,सुअनील बहाता हूँ। कर्म में हम रत रहें,यही ध्यान लगाता हूँ॥ गाँव बम्बू में जन्म लेकर, शिक्षा यही पाई है। शिक्षा पाकर बड़ा बन बेटा,ये दुनिया पराई…
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कितनी कलियों को जगाया मैंने

कितनी कलियों को जगाया मैंने, कितनी आत्माएँ परश कीं चुपके; प्रकाश कितने प्राण छितराए, वायु ने कितने प्राण मिलवाए। कितने नैपथ्य निहारे मैंने, गुनगुनाए हिये लखे कितने; निखारी बादलों छटा…
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सत्य

जो सत्य की राह पर चलते हैं, उसूलों की चासनी में पकते हैं झूठ से कभी नहीं जो डरते हैं, वही तो राजा हरिश्चंद्र बनते हैं। जो परमात्मा को सर्वस्व…
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