Author Archives: matruadmin - Page 133

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लेखनी क्यों कठघरे में

      "लेखनी क्यों कठघरे में " इस बात को ऐसे ही स्पष्ट नहीं किया सकता है । इसके कई ऋणात्मक और धनात्मक कारण हैं।     रचनाकार हमेशा…
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 कयामत

अखबार टीवी के लिए तो बस एक खबर होती है पूछो उसके दिल से हाल उसका जिस पर यह कयामत गुजर होती है । मीडिया को मिल जाता है एक…
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ग़ज़ल

  ताउम्र के लिए सितम मेहमान हुआ मेरा खाली ज़मीन खाली आसमान हुआ मेरा कुछ आरज़ू नहीं है और जग के मालिक सब जग से छूटा मगर भगवान हुआ मेरा…
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लौट आओ ना

खिडकी से दिखता छायादार पेड अब भी वहीं खडा है वह हरा भी है और उसकी शाख पर झूला भी पडा है परन्तु हृदय व्यथित है सुबह सवेरे गोरैया का…
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आत्म शुद्धता

न मन्दिर जरूरी है न मस्जिद जरूरी है न गिरजा जरूरी है न गुरुद्वारा जरूरी है परमात्म अनुभूति को आत्म शुद्धता जरूरी है आत्मा पर गर मैल हो तो ध्यान…
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तन

कंचन जैसी *काया* तेरी मदमस्त नशीली आँखे तेरी गुलाब की पंखुरी से लब हैं तेरे फूलों सा कोमल हृदय तेरा नाज़ुक कलि से हाथ तेरे नागिन सी बलखाती चाल तेरी…
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