मुझे विश्व में अब सभी पहचानते मेरे ही डर से सभी मुंह ढककर फिरते मैं छिपी थी चीन के यूहान में अवसर देख निकल आई दुनिया घूमने । सात बहनों से मैं सबसे छोटी हूँ जल, स्थल , आकाश तीनों लोको में घूमती लेकिन घर बसाती प्राणियों की फेफड़ों में […]

प्रकृति,पर्यावरण,परिवेश तीन शब्दों का आलिगंन हो तीनो है एक……………. बस इसे समझने का मन हो प्रकृति में सारी……. धरती,आकाश,वायु समाई है पर्यावरण ने ………. हाँ,इनकी सुंदरता बढ़ाई है परिवेश से……….. संस्कृति का पता होता है इन तीनो के संगम से दुनिया मे अमृत बरसता है प्रकृति के बनें  मित्र पर्यावरण […]

पहला पल, पहली घड़ी माँ का आँचल थामा था अजीब सी अनुभूति थी माँ ने भी यह माना था भुला दी तकलीफें सारी अभी-अभी माँ ने झेली थी सकूँन का वह पल था झोली में खुशियाँ खेली थी छलक पड़े आँसू भी नयन जो कल सूखे थे फुट पड़ी दूध […]

कब रुकेगा नरसंहार खूनी खेल कब रुकेगा मानवता के आगे,शीश पापियों का कब झुकेगा जीने का अधिकार है चाहे चींटी हो या हाथी खूनी खंजर रोक लो चाहे दुश्मन हो या साथी कोई हाथ जोड़ खड़ा है कोई शीश झुकाता है कोई अरदास लगाता कोई हाथ फैलाता है न सीमा […]

शत-शत नमन इस धरा को जहाँ वेदों का मंत्रोपचार हुआँ राम कृष्ण की इसी धरा पर महावीर जी का अवतार हुआँ जैन धर्म के 24 वे तीर्थकर दिगम्बर पथ  को अपनाया पंचशील के सिद्धान्तों से  ..परिचय सबका करवाया 30 वर्ष की आयु में ही वैराग्य पथ पर निकल लिये 12 […]

पैसो का दान करतें हो शिक्षा का भी दान करों जो भी है पास तुम्हारें  झोली किसी की भरो दो वक्त की रोटी तो कही से भी जुटा लेंगे शिक्षा होगी पास में परिवार भी चला लेंगे भटकेगे न इधर-उधर पुस्तकों में ज्ञान भरा है अनुभव में ही  शिक्षा है […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।