मधु यामिनी दो दिलों का संगीत, प्रीत के मीत मन मयूरा नाचे, गाए सौभाग्य गीत। रात चहके तो दिन निखरेगा, चन्दा चमके सूर्य भी दहकेगा, रात दिन महके। निशा के हाथ में जुगनू है ऐसे, कल्पना करें चाँदनी के रथ में, चाँद सोया हो जैसे। मन उदास पिया गए […]

शिव में मात्रा…जीवन की है.. शिव ही तो है…खेंवईया, शिव तांडव से…नृत्य कलाएं.. शिव डमरू से…स्वर-लहरियां॥ शिव से ही है…वशीकरण तो.. शिव से ही…उच्चाटन है, शिव से ही है…सुंदरता तो.. शिव ही सत्य…सनातन है॥ शिव से ही…मानवता पलती.. शिव ही करते…रखवारी, शिव कण्ठ में…गरल समाया.. शिव मस्तक पर…गंगझारी॥ शिव त्रिशूल […]

जननी-सी कोमल हिन्दी,                निज भाषा का सम्मान रहे, अपनेपन की महक लुटाती,                हिन्दी पर अभिमान रहे। भारतेंदु और द्विवेदी ने,              इसकी जड़ों को सींचा है, ऐसे वरद पुत्रों से जग […]

वह दृश्य भी अद्भुत होगा, हम जन्माष्टमी मनाएंगे, कान्हा अपनी बाँसुरी पर,वन्दे मातरम सुनाएंगे। कल्पना मात्रा  से ही मन झूम जाएगा, रास रचैया इस आज़ादी उत्सव में राष्ट्र ध्वज फहराएगा। स्वतंत्रता का जश्न जब मनेगा चारों ओर, दही हांडी का भी मचेगा हर जगह शोर। आओ सब मिलकर खुशियां मनाएं, […]

परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है,इसमें ढल जाओ, बदलते परिवेश की जरूरत,हो तो बदल जाओ। कितनी भी लम्बी चाहे, हो रात काली गहरी.. छँट जाएगा अंधेरा, बन सूर्य-से  निकल जाओ। पानी की तरह जीवन, है यारों मानो अपना.. कोई हो रंग चाहे, हर रंग में घुल जाओ। आशा है फ़िर […]

नए सत्र का स्वागत करने, हो जाओ तैयार साथियों सरकारी हो ‘असरकारी’, ठान लो फिर एक बार साथियों। कोई हमसे नहीं कहेगा , सुननी होगी अंतर्मन की अनुपम अवसर मिला हमें, सेवा करने बचपन की, भावी प्रतिभा छुपी अनेक,लेना तुम सँवार साथियों। नए सत्र का स्वागत करने, हो जाओ तैयार […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।