नमन मेरा

 pushpendra sinh
प्रतिदिन नमन मेरा प्रथम गुरूवर को,
नमन मेरा प्रतिदिन अंतिम गुरूवर को॥
गुरू ज्ञान है गुरू मान है
गुरूओं कारण ही पहचान है,
दिया न होता ज्ञान गुरू ने
ज्ञान रहित होता अन्ध मेरा मन,
चक्षु रहित पशुवरत होता तन॥
प्रतिदिन नमन मेरा प्रथम गुरूवर को,
नमन मेरा प्रतिदिन अंतिम गुरूवर को॥
प्रथम वन्दन भोर से पहले
आँख खुले तो मुझसे बोले,
उठकर बेटा पहले मुँह धो ले
माँ हरदम रहती चिन्तन में,
स्वर्ग बसा जिनके चरनन में॥
प्रतिदिन नमन मेरा प्रथम गुरूवर को,
नमन मेरा प्रतिदिन अंतिम गुरूवर को॥
साथ में वन्दन उस पिता को
जिसने भले-बुरे का ज्ञान दिया,
न माना तो डाँट दिया और साथ दिया
चिन्तन धर सुत का निज सुख त्याग किया,
नख-सिख तक ऋणी है उनको न कैसे ध्यान धरुं॥
प्रतिदिन नमन मेरा प्रथम गुरूवर को,
नमन मेरा प्रतिदिन अंतिम गुरूवर को॥
दूजे चरण पखारूं उनके
जिन्होंने अक्षर ज्ञान दिया,
समय बद्धता और अनुशासन ज्ञान दिया
जीने का सामान दिया,
शिक्षक बन मुझमें स्व का भान किया॥
प्रतिदिन नमन मेरा प्रथम गुरूवर को,
नमन मेरा प्रतिदिन अंतिम गुरूवर को॥
वन्दन है मेरा फिर उन चन्दन को
जिन्होंने रिश्तों का भान दिया,
बन लाड़ो-दाऊँ कभी चिढ़ाया
कभी रिझाया,
मुझे खेल से जीवन खेल सिखाया
भौजाई से ताई तक सबने कुछ व्यवहार दिया॥
प्रतिदिन नमन मेरा प्रथम गुरूवर को,
नमन मेरा प्रतिदिन अंतिम गुरूवर को॥
चलो नमन करुं उन मित्रों को
जो जीवन के हर क्रम में साथ रहे,
जिनसे कभी साद रहे और कभी वाद रहे
सुख की बेला में जिनसे ही उल्लास रहा,
दुख की घड़ी में घर के चिराग आबाद रहे॥
प्रतिदिन नमन मेरा प्रथम गुरूवर को,
नमन मेरा प्रतिदिन अंतिम गुरूवर को॥
अन्तिम वन्दन है अवसर को
जो सबसे छूटा पूरा किया उस कसर को,
अवसर है ऐसा ज्ञान हो जाये पूरक जो
भूले नहीं भूला जाता उम्र भर रहता संज्ञान,
अपना-पराया,भला-बुरा सब सिखा देता हैं वो॥
प्रतिदिन नमन मेरा प्रथम गुरूवर को,
नमन मेरा प्रतिदिन अंतिम गुरूवर को॥
हर जन कण है वन्दनीय वो जिनने
जीवनक्रम में कुछ ज्ञान दिया,
हर दिवस है गुरदिवस
जिसमें हमने भान किया,
वन्दन के चन्दन को क्यों दिन बँधाऊँ॥
प्रतिदिन नमन मेरा प्रथम गुरूवर को,
नमन मेरा प्रतिदिन अंतिम गुरूवर को॥
शिक्षक बन जिन्होंने उपकार किया
जन्म दिवस है आज उनका मनाओ,
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन नाम जिनका नित्य स्मरण कर ऐसा कर्म कर,
तम दूर करो उनको वन्दन कर जाओ॥
प्रतिदिन नमन मेरा प्रथम गुरूवर को,
नमन मेरा प्रतिदिन अंतिम गुरूवर को॥
                                                       #पुष्पेन्द्र सिंह मलिक ‘नादान’
परिचय: पुष्पेन्द्र सिंह मलिक ‘नादान’ की जन्मतिथि -१२ अक्टूबर १९७६ है। आप उत्तर प्रदेश के शहर मेरठ में बसे हुए हैं,जबकि जन्म स्थान-दिल्ली है। शिक्षा में परास्नातक (इतिहास) सहित आईटीआई(इलैक्ट्रिशियन) तथा रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन से जनरल फायर फाईटिंग कोर्स कर चुके हैं,इसलिए कार्यक्षेत्र सेना की अग्निशमन शाखा(फायरमैन) है। आप किसी विशेष विधा की अपेक्षा मन में जो भाव आया,उसे ही लिखते हैं। लेखन का उद्देश्य आत्म सन्तुष्टि ही है। आप ब्लॉग पर भी लिखते रहते हैं।

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।