
आम
मतलब
हर पल
किसी अनहोनी की
आशंका में
डरा हुआ
आदमी
इसी बात से खुश
आदमी तो है
मगर
इसका कोई
मतलब भी है
हर वक्त
खुद से भागता
कल का समय
काटने के
बहाने ढूंढ़ता
अपने
बच्चों तक से
झूठ बोलता
कोई चेहरे का
दर्द न पढ़ सके
इसके लिए
हर दिन
नए मुखौटे
लगा-लगा कर
आखिर
कहां
बचता है आदमी।
अर्द्धेन्दु भूषण
इन्दौर, मध्यप्रदेश
लेखक वर्तमान में दैनिक प्रजातंन्त्र के सम्पादक और स्तम्भकार है।

