विद्यापीठ के डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी को मिला 2022 का भारतेंदु हरिश्चंद्र राष्ट्र भाषा हिन्दी गौरव सम्मान

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लागू करने के दिशा में एक और कदम: प्रो. सारंगदेवोत  

शमशाबाद की बृजलोक साहित्य कला संस्कृति अकादमी ने किया सम्मानित

उदयपुर/ बृजलोक साहित्य कला संस्कृति अकादमी, शमशाबाद द्वारा जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय) के सहायक आचार्य डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी को वर्ष 2022 के भारतेंदु हरिश्चंद्र राष्ट्र भाषा हिन्दी गौरव से विभूषित किया है। यह सम्मान उन्हें भारतेंदु हरिश्चंद्र के ‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल’ की उक्ति को हिन्दी साहित्य द्वारा वैश्विक रूप से चरितार्थ करने हेतु प्रदान किया गया है। यह सम्मान बृजलोक साहित्य कला संस्कृति अकादमी के तिरवरनाथ द्वारा छतलानी को प्रदान किया गया।  विद्यापीठ के कुलपति कर्नल प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी  तकनीकी पाठ्यक्रमों में  हिन्दी व अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षण कार्य पर बल दे रही है और इस तरह से तकनीक व प्रौद्योगिकी के शिक्षक यदि हिन्दी में कार्य कर रहे हैं तो स्वतः ही राष्ट्र की उन्नति होगी।
बृजलोक साहित्य कला संस्कृति अकादमी के अध्यक्ष डॉ०मुकेश कुमार ॠषि वर्मा व कानूनी सलाहकार सह अधिवक्ता डॉ. नरेश निहाग ने डॉ. छतलानी के उज्जवल भविष्य, दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए इस सम्मान से सम्मानित होने के लिए बधाई दी।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।