पानी में बताशा तैर गया

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युगों के बैरी मित्र हुए,
न सगों का मन से बैर गया।
यहाँ उथले में ही डूब गए,
वहाँ पानी में बताशा तैर गया।।
युगों के बैरी मित्र हुए……
मेरा दीपक जले रात भर,
और का जलते बुझ जाए।
छलनी जिसमें छेद बहत्तर,
गैर के अवगुण बतलाए।।
खोट हैं जिनकी नीयत में,
यहाँ उन्हीं का परचम फहर गया,
यहाँ उथले में ही…..।
अपनी पीड़ा हर कोई जाने,
और का दर्द दिखावा है।
अपनी खुली तो लगे छुपाने,
गैर का झूठ छलावा है।।
खुशी गैर की हजम हुई न,
विध्वंस का खाका तैर गया…
यहाँ उथले में ही…….।
सपने रोज सजाने वाले,
खुशफहमी में रहते हैं।
रोज कमाने खाने वाले,
सदा मौज में रहते हैं।।
लेते हैं वो जब अंगड़ाई,
तो लगे जमाना ठहर गया…
यहाँ उथले में ही…….।
आपस की तकरार छोड़कर,
निर्माणों में लग जाएं।
श्रेष्ठजनों को साथ जोड़कर,
अभियानों में रम जाएं।।
विष नहीं विषग्रंथि निकालें,
तब समझें पूरा जहर गया…
फिर नहीं कहेंगे…..
यहाँ उथले में ही डूब गए,
वहाँ पानी में बताशा तैर गया।।।।
———#आर.पी.सारंग

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।