बोली संवर्धन ऑनलाइन वीडियो कवि सम्मेलन सम्पन्न – नीर

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कार्यक्रम निर्देशक नवीन कुमार भट्ट नीर ने गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए बताया की साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा बोली विकास मंच मंच पर 05 जुलाई 2020 रविवार को बोली संवर्धन ऑनलाइन वीडियो कवि सम्मेलन सम्पन्न हुआ, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आद डॉ राकेश सक्सेना जी एटा उत्तर प्रदेश, विशिष्ट अतिथि आद आचार्य संतोष अवस्थी जी अयोध्या उत्तर प्रदेश, कार्यक्रम अध्यक्ष आद राजवीर सिंह मंत्र जी साहित्य संगम संस्थान, कार्यक्रम संचालिका आद अलका जैन आनंदी जी मुंबई की गरिमा मयी उपस्थित में मां सरस्वती की पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जिसमें कुमारी निरुपमा जी ग्राम रतनपुर जिला बेगूसराय बिहार, बोली-मगही में सिया चललथिन संग सखियन सब,आद सुनीति केशरवानी नीति जी खलासी लाईन कीडगंज प्रयागराज उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय बोली भोजपुरी में बदरा आ गइल घूमड़ घूमड़ सावन भादों के महीनवा,राजेन्द्र राज मठारदेव कॉलोनी सारनी जिला बैतूल म प्र क्षेत्रीय बोली बुंदेली में इते उते की बतखोरी में अपनौ काम बना रहे हौ,आद डॉ अर्चना वर्मा जी 40 सी रवीन्द्र गार्डेन अलीगंज लखनऊ बोली -अवधी में बाबुल तोरे अंगना की हम है चिरैया,आद वन्दना  प्रियदर्शिनी जी तोमर काॅलोनी बुराड़ी दिल्ली बोली अंगिका में प्रभु विष्णु के सतमा अवतार होलै,सुकल पख के नवमी के दिनमा,आद लता सगुण खरे जी बिलासपुर छत्तीसगढ क्षेत्रीय बोली– छत्तीसगढ़ी में शिव की बढ़िया रचना पढ़ी,आद कपूराराम मेघवाल जी राज्य-राजस्थान बोली राजस्थानी में सुण के थाकों संदेशों ये,जाया मायण जारी रुदन करें,आद विनोद वर्मा दुर्गेश जी तोसाम जिला भिवानी हरियाणा बोली-हरियाणावी में राम की हूं न्यारा सै हरियाणा म्याया म्यारघ आख्यां का तारा,आद गीतांजलि वार्ष्णेय जी इफको टाउनशिप बरेली उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय बोली– बृजभाषा में पड़े सावन की रिमझिम फुहरिया भीगें मोरी चुनरिया पर बढ़िया प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आचार्य संतोष अवस्थी जी ने कहा कीभारतेंदु बाबू के अनुसार निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल। और इस बोली संवर्धन अॉनलाइन वीडियो कवि सम्मेलन का यही आधारसूत्र भी है।बोली संवर्धन की दिशा में समायोजित यह कार्यक्रम अद्वितीय अनोखा और अनूठा है। साहित्य संगम परिवार के श्री नवीन कुमार भट्ट नीर जी का साहित्यश्रम इससे स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है।ऐसे महनीय आयोजनों से काव्यकारों को अपनी बोली भाषा के प्रसार पर बल देने की प्रेरणा प्राप्त होती है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आद डॉ राकेश सक्सेना जी ने बोली संवर्धन के मुख्य अतिथि होने पर साहित्य संगम संस्थान को धन्यवाद देते हुए कहा कि आज का यह कार्यक्रम बोली के विकास के लिए एक अद्वितीय है आज के प्रतिभागियों के द्वारा प्रस्तुत रचना पर राग लय आनंद समरद्ध थी जिन्हे सुनकर आत्मा तल्लीन मनमोहित हुई, आपने बोली भाषा पर समकेन्द्रित करते हुए कविता आदि पर प्रकाश डालें,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी की पंक्ति  जामैं रस कछु होत है, पढ़त ताहि सब कोय। बात अनूठी चाहिए, भाषा कोऊ होय रख कर बताया की आज का यह कवि सम्मेलन पूरी तरह से चरितार्थ होती दिखी आप सभी को पुनः धन्यवाद। कार्यक्रम अध्यक्ष आद राजवीर सिंह मंत्र जी ने कहा की आज के कार्यक्रम में प्रस्तुति साधकों का अभिनंदन ज्ञापित करते हुये मुख्य अतिथि विशिष्ट अतिथियों की सहभागिता को नमन करते हुए कहा की बोली विकास मंच आप की उपस्थिति से गौरवान्वित है बोली विकास पर विशेष प्रचार प्रसार के प्रचार निर्देशक नीर की सहभागिता को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने पूरी लग्न पूर्वक से इस आयोजन को सफल बनाये। कार्यक्रम निर्देशक नवीन कुमार भट्ट नीर ने कहा की बोली के विकास को और रोचक बनाने के लिए सतत नये प्रयास किए जायेंगे , साहित्य संगम संस्थान दिल्ली के बोली विकास मंच ने यह निर्णय लिया है की बोली विकास मंच पर होने वाले महीने के प्रथम रविवार को सिर्फ दस प्रतिभागी ही इस कार्यक्रम में प्रदर्शन करें एक प्रतिभागी अपने क्षेत्रीय बोली पर अपनी प्रस्तुति दे ऐसे ही दस प्रतिभागी दस बोलियों पर अपनी प्रस्तुति देंगे जिससे सभी की प्रस्तुतियों को सब सुन सकें, प्रतिक्रिया दें सके, प्रतिभागियों का उत्साह वर्धन हो सके ,समय की अहमियत को रखते हुए यह निर्णय लिया है, पोस्टर, समाचार आदि से इसका अधिक से अधिक प्रचार हो सके।आज के कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से उपस्थित कवि गणों को सादर आभार वंदन की आपकी प्रस्तुति वाकई कमाल की अलग अलग बोलियों का रसपान करवाया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आद आचार्य संतोष अवस्थी जी, मुख्य अतिथि आद डॉ राकेश सक्सेना जी, कार्यक्रम अध्यक्ष आद राजवीर सिंह मंत्र, कार्यक्रम संचालिका आद अलका जैन जी का साभार अभिनंदन आपकी विशेष उपस्थिति व आर्शीवचन से कार्यक्रम सफल हुआ।आज के कार्यक्रम की सफल आयोजन के लिए सादर अभिवादन, राजेंद्र तिवारी राज  ने कहा कि  नवीन कुमार जी ” नीर ” के निर्देशन में एवं अन्य सभी मंचस्थ विद्वज्जनों की गरिमामय उपस्थिति में आज का आयोजन पूर्ण रूपेण सफल रहा है। यह आयोजन साहित्य संगम संस्थान के बोली संवर्धन कार्यक्रम की दृष्टि से महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। श्रेष्ठतम रचनाओं की प्रस्तुति के लिए सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ। इस प्रकार का आयोजन प्रति सप्ताह या पाक्षिक हो, तो और अच्छा रहेगा। मंच पर रचनाएँ और अधिक परिष्कृत तथा प्रभावी रूप प्राप्त कर सकें , इसके लिए बोलियों के वरिष्ठ रचनाकारों का मार्गदर्शन लाभकारी सिद्ध  होगा। एक बार पुनः सफल आयोजन के लिए बहुत बहुत बधाई एवं साधुवाद, कुमारी निरुपमा ने कहा कि आदरणीय नवीन कुमार भट्ट के निर्देशन तथा विशिष्ट अतिथि आदरणीय आचार्य श्री संतोष अवस्थी जी एवं मुख्य अतिथि आदरणीय डॉ राकेश सक्सेना जी की गरिमामय उपस्थिति तथा हमारे परम आदरणीय अध्यक्ष महोदय श्री राजवीर सिंह’मंत्र‌‌‌ जी के उद्बोधन ने आयोजन को जीवंत बना दिया। क्षेत्रीय बोली के संवर्द्धन के लिए सुंदर प्रयास और सम्मानित कवि एवं कवियत्री गण की प्रस्तुति बड़ा मनमोहक रहा। आयोजन इसी तरह होता रहे, सफलता मिलती रहेगी पुनः सफल आयोजन की हार्दिक बधाई,इस सफल आयोजन पर डॉ भावना दीक्षित,छाया सक्सेना,रविशंकर विद्यार्थी,नवल किशोर,डॉ राजेश शर्मा,गीता गुप्ता मन,किरण अग्रहणी, महालक्ष्मी सक्सेना,हिमांशु गुप्ता,त्रप्ति त्रिवेदी, संगीता जैन,दामयंती,जय वर्मा, अनिल धवन, कुमार तरुण सागर, आशुतोष त्रिपाठी,आयुषी तिवारी आदि उपस्थित रहे।
नवीन कुमार भट्ट नीरकार्यक्रम निर्देशक

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।