भ्रष्टाचार की नगरी में लक्ष्मी लक्ष्मी हो रहा। हर तरफ फैल रहा फिर भी सो रहा हर जगह उपद्रव है हर नगर में शोर अपने अपनों से देखो दूर हो रहा भ्रष्टाचार की नगरी में लक्ष्मी लक्ष्मी हो रहा। लक्ष्मी भक्त का कहर गरीब गाँव शहर दिन रात रो रहा […]
काव्यभाषा
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