वो सीने से लगकर यूँ रो दिए जितने भी पाप थे,सारे धो दिए छूके अपनी जादुई निगाहों से जवानी के कितने वसंत बो दिए हर पल हीरा हर पल जवाहरात अपनी ज़िंदगी के पल उसने जो दिए साँसों के महीन धागे में चुन चुनकर तासीर के बेशकीमती मोती पिरो दिए […]
काव्यभाषा
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