शंकर ध्यान करते शिव का होता नटराज नृत्य का गान पिता परमात्मा खुश हो जाते रखते शंकर महिमा का मान देवत्व जो भी धारण करते परमात्मा के प्यारे कहलाते है विकार रहित पावन बनकर स्वर्णिम सतयुगी हो जाते है कलियुग का यह अंतिम चरण दुर्लभ संगम युग कहलाता है परमात्मा […]
काव्यभाषा
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