जमदग्नि ऋषि हुए महान रेणुका ने जन्मा परशुराम । चहुंओर गाएं मंगल गान धन्य हुआ जानापाव धाम ।। फूलों को दी इन्होंने खुशबू सह्स्त्रार्जुन को देकर मात । अधर्म धरा से मिटाने आएं साक्षात भगवान परशुराम ।। करें मानव सदा नेक काम इतिहास में अमर हो नाम । प्राणियों को […]
काव्यभाषा
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