यह संसार मिथ्या है इसे समझ को खूब कही दुख की छाया है कही खुशियों की धूप दुख सुख कभी टिकते नहीं एक साथ कभी चलते नहीं समान भाव से जिये जो इनको उससे बलवान कोई होता नहीं यह तो है परमात्म लीला बस इसपर किसी का चलता नहीं। #गोपाल […]

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  हिन्दी भाषा की बिंदी  में शान। तिरंगे के गौरव गाथा की आन।। राजभाषा का ये पाती सम्मान। राष्ट्रभाषा से मेरा भारत महान ।। संस्कृत के मस्तक पर चमके। सिंधी,पंजाबी चुनरी में दमके।। बांग्ला,कोंकणी संग में थिरके। राजस्थानी चूड़ियों में खनके ।। लिपि देवनागरी रखती ध्यान। स्वर व्यंजन में है […]

कुछ अपनी निशानियाँ भी लिख दो कोरे पृष्ठों में कुछ चित्रकारी कर दो, सुख-दुख के क्षणों को इनमें लपेट दो इन किताबों में तितलियाँ समेट दो ।। लोग थक हार कर लौट आएंगे जब रास्ते में  बिछी कहानियां पाएंगे तब भूली बिसरी यादों को शुष्क हाथों से सहला नम हो […]

सुना है ज़माने के साथ लोग बदलते हैं शहर में कुछ पीर आजकल भी रहते हैं आँख भरके देखते हैं क़द्र न की जिसने  मचलते हैं क्यों इतना पूँछ के देखते हैं चाँद से बढ़ कर रोशन सादगी जिनकी हर दिन वो शान से बाहर निकलते हैं हुजूम से परे उन पर निगाहें ठहर गई तितलियाँ मँडरातीं हैं शायद महकते हैं उतरे चेहरे सँवार के भी ख़ामोश बहुत जहाँ भर की ख़ुशी आस पास रखते हैं तिरे पीछे तिरि परछाँइयों से की बातें चश्म हैराँ मिरि अक़्स कमाल करते हैं मुंसिफ-ए-बहाराँ तिरि एक नज़र को ‘राहत’ तेरे कूचे से दिन रात गुजरते हैं   #डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’   Post Views: 61

अन्नदाता ने मांगा हक तो तेवर उनके बदल गए जो पेट भरता है सबका उन पर सरकार अकड़ गए अहिंसा दिवस पर हिंसा का किसानों पर जोर आजमाया गन्ने का मूल्य ही तो मांगा था पुलिस से क्यों उन्हें पिटवाया भूखे पेट रहकर किसान पेट अमीरों का भरते है फसल […]

तनहा होने का अहसास अब नहीं होता तू ही बता तू मेरे साथ कब नहीं होता ========================== मिले जितना भी उससे ज्यादा माँगता है ये क्यों इंसान कभी बे-तलब नहीं होता ========================== किसी को भी फिज़ूल समझने की भूल न कर इस जहाँ में कुछ भी बे-सबब नहीं होता ========================== […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।