इस बार की ग्वालियर की यात्रा के दौरान एक पूरा दिन ‘ताज’ के नाम रहा…28 नवंबर की सुबह करीब ढाई घण्टे के सफर के बाद हम ‘उत्कल एक्सप्रेस’ से ग्वालियर से आगरा पहुंचे… इसके पूर्व करीब तीन दशक पहले यहां आया था…तब के ‘ताज’ और अब के ‘ताज’ की रौनक […]
रश्मिरथी अरुण जैमिनी: हास्य के रंग में साहित्य की किलकारी डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ सरकारी कार्यालय में नौकरी मांगने पहुँचा तो अधिकारी ने पूछा “क्या किया है” मैंने कहा- “एम.ए.” वो बोला- “किस में” मैंने गर्व से कहा- “हिन्दी में” उसने नाक सिकोंड़ी “अच्छा… हिन्दी में एम.ए. हो बड़े बेशर्म हो अभी तक […]
ज्ञान धन बाँट-बाँट कर , खुद भिक्षुक बना रहे । अन्याय सहे चुप रहे, वो सच्चा गुरु बना रहे । बदल गई गुरु की परिभाषा, गुरु भी इसे समझता रहे । आज तो यही सच है , गुरु सबसे डरता रहे । जीवन का पाठ पढ़ाने वाला , जीवन क्या […]
बार बार सबके मन में यह प्रश्न उठता है कि शिक्षा के क्षेत्र में इतना खर्च करने के बाबजूद आखिर सरकारी विद्यालय में शिक्षा के स्तर में सुधार क्यों नहीं हो रहा है l सरकारी स्तर पर कई कार्य किए भी जा रहें हैं, पर सुधार की गति अत्यंत धीमी […]
भगवान माने क्या? इन्सान माने क्या? माने या न माने सब खेल-खेल बहाने क्या हम किसी की माने है सब लुभावने सपने सुहाने किसी होर की बात माननी है क्योकि उसे लोग जानते है या उसका पहनावा पहचानते है आज हमारे वस्त्र फ़टे ही सही। खुद को […]
लोकतंत्र तो नाम का रह गया है श्रीमान कोई भी चुनाव सस्ता नही आम आदमी परेशान जिसके पास धन दौलत वही लड़ सकता है चुनाव गरीब की तो बीच रास्ते डूब जाती है चुनावी नाँव पंचायत से लेकर संसद तक धनाढ्य ही चुनकर जाते जिनके पास नही है पैसा वही […]
मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए।
आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं।
कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।