शिशिर ऋतु की हुई बिदाई बसंत आया धरा पर बधाई ।। मंद-मंद हवा चली गांव-गली डाल-डाल पर कलिया खिली ।। कोयल वन-आंगन कूक रही तितली रानी हुलस रही ।। भौंरों का सुमधुर गीत सुन कुमदिनी भी बिहँस रही ।। हर्षित जन – मन ,वन – संत आया धरा पर प्यारा […]
ख्वाब आँखों में जितने पाले हैं सब के सब टूट जाने वाले हैं ==================== जो पसंद हो वही नहीं मिलता खेल कुदरत के भी निराले हैं ==================== हमें तुम क्या मिटाओगे, हमने सीने में तूफान पाले हैं ==================== कोई आवाज़ न उठाएगा यहां सबकी ज़ुबां पे ताले हैं ==================== कहीं […]
