घर का दरवाजा खोलता हूँ नीचे एक पत्र पड़ा है शायद डाकिया अंदर डाल गया है उत्सुकता से खोलता हूँ माँ का पत्र है एक-एक शब्द दिल में उतरते जाते हैं बार-बार पढ़ता हूँ फिर भी जी नहीं भरता पत्र को सिरहाने रख सो जाता हूँ रात को सपने में […]

मातृ दिवस पर सभी माँओं के चरणों में समर्पित…….. माँ ही प्रथम पाठशाला है। माँ ने दुःख सहकर पाला है।। माँ संसार की अनुपम कृति है। माँ प्यार भरी संस्कृति है।। माँ नूर नहीं कोहिनूर है। माँ प्रेम से भरपूर है।। माँ खुदा का दूजा रूप है। मां प्यार भरा […]

वतन का रूप बदलेगा कभी,मुझको नहीं लगता, चमन खुशबू से महकेगा कभी,मुझको नहीं लगता। खिलेंगे फूल खुशियों के गरीबों के भी जीवन में, अब ऐसा सूरज निकलेगा कभी,मुझको नहीं लगता। दिनों-दिन जिस कदर अपने में बढ़ती जा रही महंगाई, चने का भाव उतरेगा कभी,मुझको नहीं लगता। गगन के चांद को […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।