हे लाल उठों, काल उठों,उठों हिम विशाल भारत की सुप्त आत्माओं, जागों बन ज्वाल । आंतकवाद, नक्सलवाद पनपा बनकर ताड़ भस्मासुर घूम रहें लगाने खौंफ की चौपाल ।। सूख रहें एकता – प्रेम – भाईचारे के ताल शांति के मधुबन में इंसानियत बन बैठी चांडाल । नौनिहाल हो रहें गुमराह […]
