जो खोट है अपने अंदर उनको कर लो अभी से दूर स्वर्णकार बनकर स्वयं सोने संग बन जाओ कोहिनूर घोर कलियुग की कालिमा अब छंटने ही वाली है युग परिवर्तन की बेला है सतयुग किरण आने वाली है इसके लिए खुद को अब तैयार करना होगा जो विकार बचे है […]

दशकों से हिन्दी भाषा के स्वाभिमान, स्थायित्व और जनभाषा के तौर पर स्वीकार्यता का संघर्ष जारी है। उन्नीसवीं शताब्दी में भारत में भावनात्मक क्रांति का शंखनाद हो चुका था। उस समय भारत की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति अत्यन्त दयनीय हो चुकी थी। देश में होने वाले आन्दोलनों से जन-जीवन […]

हिन्दी को प्रचार प्रसार की आवश्यकता है, पर किस तरह, यह एक बहुत मूल प्रश्न है । आम तौर पे कोई भी आंदोलन को स्थापित करने के लिए एक विशेष रणनीति की आवश्यकता होती है, किंतु जब किसी माध्यम को स्थापित करना हो, तो वहां रणनीति की अपेक्षा एक स्वस्फुरित […]

मोरिशस में जो हुआ, वह 11 वां विश्व हिंदी सम्मेलन था। वह तीन दिन चला। 18, 19 और 20 अगस्त ! लेकन उसे महत्व कैसा मिला? जैसा कि किसी गांव या छोटे शहर की गोष्ठी-जैसा! क्यों? सरकारी लोग इसका कारण अटलजी को बताते हैं। उनका कहना है कि अटलजी के […]

महत्वपूर्ण सूचना असंयमितता, अनियमितता और अभ्रद्रता के चलते कुछ लोगों को संस्थान से बाहर कर दिया गया है| मूलत: मातृभाषा.कॉम का मालिकाना हक व संस्थापन डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’ द्वारा किया गया है| मातृभाषा.कॉम सहित हिन्दीग्राम,  व मातृभाषा उन्नयन संस्थान भी उन्हीं के निर्देशन संचालित है | कुछ लोगो द्वारा रचनाकारों […]

  जिन सैनिकों के भरोसे पूरे वतन की रक्षा की जिम्मेदारी हो,वो ही जवान अवसाद में आकर अपने साथी जवानों की हत्या कर रहे हैं,तो इससे वीभत्स एवं चिंताजनक स्थिति ओर कुछ नहीं हो सकती है। थोड़े दिन पहले एक सैनिक द्वारा घटिया खाने की शिकायत का एक वीडियो वायरल हुआ था,और […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।