जो अभी तक दल बदल रहे थे, परिणाम आते ही कुछ तो रंग वदलेंगे। विजयश्री पाकर चलेंगे अकड़कर, ऐसे अपना वो भी स्वभाव वदलेंगे। बिना कमीशन के तो फिर ये नेता उखड़ी, सड़क पर डामर तक नहीं वदलेंगे। सूरत क्या बदलेंगे शहर की वो जानते हैं उन्हें पहले खुद की […]

सब कहते शीतल , मनोरम है चांद, खूबसूरत इसे जग कहे पर यह शांत। तिमिर में करता है यह सदा उजाला, इसलिए तो बेदाग कहलाया है चांद। जब होती है रोजाना प्यारी-सी सांझ, मन को लुभाता ढ़लती सांझ में चांद। इसकी महिमा है,बड़ी ही निराली, व्रत तोड़ती है महिलाएं देखकर […]

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किसी जमाने में वे ‘अबे ओ बच्चा’ थे, फिर बच्चा बाबू कहलाए..सरकार में आ गए तो श्रीमंत बच्चा बाबू हो गए ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने का हल्ला हुआ तो अब सर बी.बी. हैं। स्मार्ट सिटी बनाने की जिम्मेदारी सर बी.बी. पर भी है,सो होली के ठीक पन्द्रह दिन पहले उन्होंने प्रजा […]

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बहुत सालों बाद धनाढय घर की बहू मीरा उम्मीद से है,घर में खुशियों का माहौल है। सब उसे कई सलाहें-बेटा ऐसा मत करना, ऐसा खाओगी तो आने वाला बच्चा गोरा होगा,स्वस्थ होगा और न जाने क्या क्या…दे रहे हैं। मीरा के साथ ही मोहल्ले में झाड़ू निकालने वाली कला भी […]

जिस तरह नशा, शराब में नहीं.. अपने-आप में होता है, ठीक उसी तरह मजा किसी वस्तु; स्थिति या परिस्थिति में नहीं,अपने-आप में होता है। जिन्दगी का मजा लेना भी, एक फन,एक हुनर अदाकारी, कलाकारी है, जो हर किसी के बस की बात नहीं है। उत्सव का आनन्द, मौसम की मस्ती.. […]

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पता नहीं क्यों, हर अच्छे कार्य और दिवस की शुरुआत आंदोलन से ही हुई है, चाहे वो महिला दिवस हो या आज उपभोक्ता दिवस| सबसे पहले उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत अमेरिका के रल्प नाडेर के नेतृत्व में हुई और तब १८६२ को अमेरिकी कांग्रेस में जॉन एफ कैनेडी द्वारा उपभोक्ता […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।