चमन के फूल हम सारे, हमारा देश न्यारा है। हमारी भूमि में शामिल, परम इतिहास प्यारा है॥ हिमालय की बुलंदी से, यही आवाज है आती। बचा लो हिन्द के वीरों, वतन के आन की थाती॥ लुटाया लाल माँओं ने, दुल्हन पति को बहन भाई। बहुत कुर्बानियाँ लेकर, ये आजादी – […]

कहाँ गईं वो भारत माँ की गौरवशाली गाथाएं, रण में स्वयं भेजने वालीं जीजाबाई माताएं। रानी पद्मिनि, पन्नामाता, लक्ष्मीबाई लाखों थीं, पर इतिहास देख पाया बस चारण कवि की क्षमताएं। हर दिल की आवाज बनेगी, अवध लेखनी राज करेगी॥                 #अवधेश कुमार ‘अवध’ 

एक तरफ कर्त्तव्य रखा हो, दूजे  ओर  रखा अधिकार। तौल करें हम हृदय तुला से, फिर लघु-गुरु का करें विचार॥ छोड़ कर्म को,बस केवल हम, स्वार्थ भावना के आधीन। ऐसे  देश  नहीं    सुधरेगा, जल बिनु नहीं बचेगी मीन॥ हक को भूल,कर्म के पथ पर, मौन खड़े क्यों? कदम बढ़ाए। […]

सीमा के बाहर से  दुश्मन, सरहद के  भीतर  गद्दार। दोनों एक हुए हैं मिलकर, इन्हें पठाओ यम के द्वार॥ एक  हाथ  में  पत्थर,दूजे हाथ लिए घातक हथियार। भारत माता को पहनाओ, ऐसे   नरमुंडों   के   हार॥ भरतवंशियों! निंद्रा त्यागो, रक्तबीज का करो सफाय। अब  तो जागो मीत हमारे, […]

कारण   जो   बर्बादी   के  हैं, वही   पूछते   कारण   बोल। बेइमान    के  हाथ     तराजू, मनचाहे    बांटों    से  तौल॥ जिसकी लाठी भैंस उसी की, जंगलराज   हुआ    आबाद। डोली   उनके    ही   हाथों में, दुल्हन  नहीं क्यों  हो […]

भारतीय अनमोल धरोहर, सबके अन्त: में हो योग। संयम का  यह महामूल है, इससे काया रहे निरोग। अजर अमर जीवन पाने के, हेतु करें नित प्राणायाम। ओम जाप यदि मुश्किल हो तो, जप लें केवल राघव  राम। योग   साँस  का लेना-देना, करें योग, जीवन  मुस्काय। अब  तो  जागो   […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।