सच चुभै सै

Read Time0Seconds

भीतर की बात
रचनाकार का मन सबका मन होवे सै खुद तै हट कै पूरी दुनिया में घट रही घटनाओं को आपणी कविता के माध्यम से अंकुरित करै सै। रचनाकार अपनी कविता एक खातिर नहीं बल्कि पूरे समाज खातर लिखै सै, सबकै लिये लिखै सैं। मैं ग्रामीण जीवन परिवेश से जुडा हुआ हूं। उस परिवेश की सुगंध मैं अपनी कविताओं के माध्यम तै कविताओं की सुगंध ग्रामीण परिवेश तक पहुंचाण की कोशिश करू सूं। मेरी कविता का आकर्षण, अर परिवेश की निकटता ही असली मानव को निर्मित बनाने का काम करै सै यू हे आधार सैं
मेरा नये काव्य समूह में मैंने अपने ग्रामीण क्षेत्रों की भूमिका को कविता के माध्यम से एक नया रूप दिया सै। कविताओं के माध्यम से मुझे कटु सत्य लिखने का भरसक प्रयास किया सै। अर पाठक को सोचने और अनुभव करने को विवश करा सै। आज के टैम में नैतिकता को कुचल डाला सै और दयालु को भी मिटा डाला सै। स्वतंत्र भारत में भी आदमियों के अधिकारी, सुख आदि चुन्नी के पलले की तरह ढक राख्या सै। याडे़ समाज के कुछ लम्बरदारों ने कब्जा कर राख्या सै आज भी वहीं स्थिति होग्यी सै जो आजादी के टेम पै थी।
आज कुर्सी ही खैन्चे मंें धंसी पड़ी सै उसनै साफ करणीयां कोन्या, कोई ना अच्छी तरह से सम्भाल पारे से क्योंकि कुर्सी ते बहुत सारे दाग लाग्य रहे सै जिस प्रकार बरसात के टेम अच्छी खासी दिवार भी छत की मिट्टी से बदरंग हो जावै सै यूं हे कारण सै आज नैतिकता, विश्वास, सच, आत्मीयता सब की सब खुग्यी सै।
अर जीवन को पिछाण नहीं रही सैं। हर आदमी का दिमाग जकड़ा हुआ सै किसी नै किसी रूप में उसने जकड़न सै उभर कर बाहर नहीं आ रहा है। अलग-अलग चेहरा में बहुत घणाएं फर्क आवै सैं। जिनके कारण नकली दिखावा ढेर हो रहा सैं
मन्नै मेरे इस काव्य संग्रह में राष्ट्रीयता, प्राकृतिक व जमीन में दबे हुए मुद्दों को उठाने की कोशिश की सैं मन्नै नये पाठाकें के दिलों दिमाग पर जकड़न हटाने की कोशिश की सैं जो आज चारों ओर फैला हुआ सै।
मुझे इतना तो मालूम नहीं सै कि किसी कविता में अलंकार, छंद, रस दिया गया सै लेकिन मुझे इनको कविता में पिरोने का पूरा प्रयास किया है।
लेकिन आज का समय छंद मुक्त कविताएं लिखने का दौर सै या मैं कह सकूं सूं कि छंद मुक्त वादी युग कोनी क्योंकि आज के टेम में भी छंद मुक्त कविता में अपनी जुबान का रस घोल देते दै कि लय की गति ओर बढ़ जावै सैं मेरा नया काव्य संग्रह मैं छंद बांधन खातर कतराता हूं क्योंकि इस मामले मैं अभी नर्सरी कक्षा का बच्चा सूं। अगर कविता के भीतर लय नहीं सै तो वह कविता नहीं रहती।
मन्ने किसी से एक को दोषी देना गलत सै कोई आज का दौर हवा मैं बाते कर रहा सै अर जिस तरफ की हवा होवै सै उसी ये बात करै सै सब कुछ हवा के अन्दर बह गया सै कुण जानै सै के भविष्य की नोका कित डटगी या डूबगी। इस बात का तो बेरा कोन्या।
मन्नै इस कविता संग्रह के अन्दर यथार्थ झलकाने की पूरी कोशिश करी सै। मेरी आशा सै कि आपको मेरा यूं नया दूसरा काव्य संग्रह जरूर पसंद आवेगा। पिछले में मन्नै अनेक सामाजिक कुरीतियों को दूर किया सै। इस काव्य संग्रह में भी ठीक मन्नै समसामयिकी विषयों पर ज्यादा जोर डाल्या सै।
खान मनजीत भावडि़या मजीद

0 0

matruadmin

Next Post

निःस्वार्थ

Mon Jan 11 , 2021
सगा होना जरूरी नही रिश्ते कराते एहसास संकट मे जो पास खड़ा वही तो अपना खास एक ही कोख से जो जन्मे फिर भी नही प्यार उनमे उनसे तो वे गैर ही भले हित भरा जिनके दिल में रिश्ते नाते सब स्वार्थ के स्वार्थ नही तो किस बात के निःस्वार्थ […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।