देश के हलात खराब है,क्या करोगे तुम देखकर

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देश के हलात खराब है,क्या करोगे तुम देखकर |
कुछ लोग देश बेच रहे है,रो पड़ोगे तुम देखकर ||

नाम नहीं लेता हूँ मै उसका,खुद ही समझ जाओगे |
दुश्मन देश में शूटिंग होगी,अपने देश को छोड़कर ||

देश प्रेम है केवल दिखावा,मन में उसके कुछ और है|
लोगो को वह लुभाता है,”सत्यमेय विजयते”वह कहकर ||

चारो तरफ हहाकार मचा है,सारे कारोबार है बंद पड़े|
छोटे बच्चे सामन बेचते है,फुटपाथ पर अकेले बैठ कर ||

कोई गुब्बारे बेच रहा है,कोई झंडे पेपर है बेच रहा |
बच्चे ही बच्चो को देखकर,रो पड़ते है वे सब देखकर ||

मजहबी तूफान मचा है,कोई किसी की सुनता नहीं |
धर्म ईमान बिक रहा है,मंदिर मस्जिदों में बैठ कर ||

गरीबी हटाने के चक्कर में,और लोग भी गरीब हो रहे |
गरीब बिकता है हर कोने में,आँखे देखो तुम खोल कर ||

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।