तेरे बगैर

Read Time0Seconds

हो जाती है कभी शाम भी तेरे बगैर,
पर तेरी यादों के बगैर मेरा एक पल भी बीता ऐसा कभी भी न हुआ…,
ढेरो शिकायते है तुम्हे मुझसे,
पर उन शिकायतों को मैंने दिल पर लिया ऐसा कभी भी न हुआ…
लाजमी है तुम्हारा रूठ जाना मुझसे,
पर तेरे रूठने पर मेरा दिल न रोया ऐसा कभी भी न हुआ….
हृदय में मेरे अथाह प्रेम है तुम्हारे लिए,
पर उसमे उतरकर कभी तूने देखा,ऐसा कभी भी न हुआ….
रातों को तू मेरे ख्वाबो में हर रोज आये,
पर सुबह तुझे याद कर मेरे लब न मुस्कुराए,ऐसा कभी भी न हुआ….
करती हूं वादा तेरा साथ कभी न छोडूंगी,
इन वादों को मैं तोड़ जाऊँ हा ऐसा कभी भी न होगा…….!!

#निशा रावल
   छत्तीसगढ़

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

जीवन में रस घोले हिन्दी

Sun Sep 15 , 2019
मन की गाँठें खोले हिन्दी। जीवन में रस घोले हिन्दी।। मैं भी बोलूँ, तुम भी बोलो। मन से जन-जन बोलें हिन्दी ।। जीवन में रस घोले हिन्दी। धरती बोले, अम्बर बोले। सरिता बोले, सागर बोले।। बूँद बोले, महासागर बोले। पवन बोले, सुमन बोले। झूम-झूम के ‘सावन’ बोले। मन का ताला […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।