तेरे बगैर

0 0
Read Time1 Minute, 0 Second

हो जाती है कभी शाम भी तेरे बगैर,
पर तेरी यादों के बगैर मेरा एक पल भी बीता ऐसा कभी भी न हुआ…,
ढेरो शिकायते है तुम्हे मुझसे,
पर उन शिकायतों को मैंने दिल पर लिया ऐसा कभी भी न हुआ…
लाजमी है तुम्हारा रूठ जाना मुझसे,
पर तेरे रूठने पर मेरा दिल न रोया ऐसा कभी भी न हुआ….
हृदय में मेरे अथाह प्रेम है तुम्हारे लिए,
पर उसमे उतरकर कभी तूने देखा,ऐसा कभी भी न हुआ….
रातों को तू मेरे ख्वाबो में हर रोज आये,
पर सुबह तुझे याद कर मेरे लब न मुस्कुराए,ऐसा कभी भी न हुआ….
करती हूं वादा तेरा साथ कभी न छोडूंगी,
इन वादों को मैं तोड़ जाऊँ हा ऐसा कभी भी न होगा…….!!

#निशा रावल
   छत्तीसगढ़

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

जीवन में रस घोले हिन्दी

Sun Sep 15 , 2019
मन की गाँठें खोले हिन्दी। जीवन में रस घोले हिन्दी।। मैं भी बोलूँ, तुम भी बोलो। मन से जन-जन बोलें हिन्दी ।। जीवन में रस घोले हिन्दी। धरती बोले, अम्बर बोले। सरिता बोले, सागर बोले।। बूँद बोले, महासागर बोले। पवन बोले, सुमन बोले। झूम-झूम के ‘सावन’ बोले। मन का ताला […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।