देश में फर्जी पार्टियों की भरमार

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vaidik
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में कुल मिलाकर 2091 राजनीतिक पार्टियां हमारे चुनाव आयोग में पंजीकृत हैं। जिस देश में लगभग 2100 पार्टियां हों, उसका लोकतंत्र कितना सबल और संपन्न होगा, इसका आप अंदाज लगा सकते हैं। यदि कोई पार्टी है तो उसके कुछ सदस्य भी होंगे, उसके कुछ नेता भी होंगे, उसके कुछ सिद्धांत और कार्यक्रम भी होंगे, उसके पास संगठन को चलाने के लिए पैसा भी होगा। इसका अर्थ यह भी हुआ कि इस देश में विचारों की आजादी का भरपूर उपयोग हो रहा है। जो चाहे, सो अपनी पार्टी बना सकता है, अपने विचारों का प्रचार कर सकता है और चुनाव लड़कर सत्ता में भी आ सकता है। लेकिन ये हाथी के दांत हैं। खाने के और है और दिखाने के और हैं। ये जो पार्टियां अपने आपको चुनाव आयोग में रजिस्टर करवाती हैं, वे प्रायः सिर्फ रजिस्टर में ही जिंदा रहती हैं। ऐसी पार्टियों से जुड़े कुछ लोगों ने मुझे बताया कि इन्हें पंजीकृत कराने के पीछे तरह-तरह की तिकड़में होती हैं। कई लोग अपने नाम के आगे कोई उपाधि जोड़ने के लिए इतने बेताब होते हैं कि वे इस सरल रास्ते को अपना लेते हैं। अपने आपको डाॅक्टर या पीएच.डी. बताना तो बड़ा कठिन है लेकिन अपने आप को किसी पार्टी का अध्यक्ष या महामंत्री बताना बिल्कुल सरल है। इतना सरल है कि आपके पास सिर्फ 10 हजार रु. हों और सौ मतदाताओं के दस्तखत हों तो आप अपनी पार्टी को पंजीकृत करवा सकते हैं। आजकल चुनाव का मौसम है। पिछले 44 दिन में 22 पार्टियों का चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन हो गया है। ऐसी पार्टियों के कुछ ‘नेताओं’ ने मुझे बताया कि वे अपनी पार्टी के कोश में लाखों-करोड़ों का चंदा लेकर काले धन को सफेद कर लेते हैं। उनके किसी सदस्य ने कभी चुनाव भी नहीं लड़ा। वे सिर्फ कागजी पार्टियां हैं। वे भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं करतीं। मान्यता-प्राप्त पार्टियां भी जमकर काले धन का इस्तेमाल करती हैं लेकिन वे अपनी राजनीतिक भूमिका निभाने में कोई कोताही नहीं करतीं। चुनाव आयोग को पंजीकरण की शर्तें इतनी कठोर कर देनी चाहिए कि फर्जी पार्टियां सिर भी न उठा सकें।
#डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।