· डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ हर दिन त्योहार, हर दिन पर्वों के आनंद का उल्लास, पर्वों की परम्परा में आनंद की खोज और उसी खोज से अर्जित सुख में भारत भारती की आराधना करते हुए प्रसन्न रहने का भाव इस राष्ट्र को सांस्कृतिक समन्वयक के साथ-साथ उत्सवधर्मी भी बनाता है। […]

हाँ! मैं राजेन्द्र माथुर हूँ। मालवा भूमि पर 7 अगस्त, 1935 को मध्य प्रदेश के धार जिले में जन्म हुआ, प्रारंभिक शिक्षा धार, मंदसौर एवं उज्जैन में हुई। उच्च शिक्षा के लिए इंदौर आ गया, जहाँ मेरे पत्रकारिता जीवन की शुरुआत हुई। ‘नई दुनिया’ के संपादक राहुल बारपुते जी से […]

भारतीय संस्कृति सदैव से ही मातृशक्ति की आराधक व पूजक के रूप में संसार में प्रसिद्ध है। शक्ति की उपासना और प्रथम स्थान की आराधना का तत्व भी शक्ति को माना जाता है। सनातन ग्रंथ मनुस्मृति में तो स्पष्ट लिखा भी है कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ यानी […]

सृजन, चयन, लेखन के मौलिक गुणों के साथ संसार में स्त्री को सृजक के साथ-साथ कुशल नेतृत्वकर्ता भी माना जाता है, और स्त्री उस दायित्व में भी अपनी अदद पहचान के साथ समाज का गौरव बनकर उभरीभी है, ऐसे सैंकड़ो उदाहरण हमारे सामने उपलब्ध हैं। एक स्त्री को सृजन और […]

फरवरी की छहः तारीख, रविवार की सुबह जिस बुरी ख़बर को लाई, वो कभी न् भूल पाने वाली ख़बर रही। इन्दौर में जन्मी और पूरे भारत ही नहीं अपितु वैश्विक मण्डल में अपने स्वर से स्वयं को स्थापित करने वाली साधिका लता मंगेशकर की सुरलोक की यात्रा का समाचार स्तब्ध […]

राजनीति के अजातशत्रु का यूँ चला जाना…..खल गया साहब 🖊 डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ विधि के विधान के आगे विधिविद की भी नहीं चली, कर्क रोग ने जब से जकड़ा वित्त और न्याय मंत्री का दायित्व भी कमजोर होता चला गया, लंबे समय से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष […]

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।