जब जब स्वयं में , ‘मैं’ आ जाता विवेक स्वतः हर लिया जाता देह अभिमान सिर चढ़ जाता अच्छा -बुरा समझ नही आता मिथ्या सोच ‘मैं ‘हो जाती करता तो ईश्वर है यह समझ नही आती ‘मैं’ ही प्रगति का अवरोधक बनती स्वयं के विनाश का कारण बन जाती अगर […]
आचार्य हेमचंद्र ने समस्त व्याकरण वांड्मयका अनुशीलन कर शब्दानुशासन एवं अन्य व्याकरण ग्रंथोकी रचना की। पूर्ववतो आचार्योंके ग्रंथोका सम्यक अध्ययन कर सर्वांड्ग परिपूर्ण उपयोगी एवं सरल व्याकरणकी रचना कर संस्कृत और प्राकृत दोनों ही भाषाओंको पूर्णतया अनुशासित किया है। हेमचंद्रने ‘सिद्वहेम’ नामक नूतन पंचांग व्याकरण तैयार किया। इस व्याकरण ग्रंथका […]
