झूठ के हाथों सत्य का अपहरण हो गया है शासन-प्रशासन देश का कुम्भकरण हो गया है पैसे वाले जीत जाते है हर बार वहां पर इंसाफ के मंदिरो का बाजारीकरण हो गया है ….. खूब चल रहा है बाबाओं का ढ़ोंग धतुरा अंधविश्वास मे डूबा है भारत देश पुरा सियासत […]
काव्यभाषा
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