बीत गई दो अक्टूबर गांधी फिर अप्रासंगिक हो जाएंगे कुछ को गांधी की कमियां कुछ को गोड़से भाएंगे जिनसे मिलती हो वोट वही फार्मूला अपनायेंगे गांधी,शास्त्री का क्या है? किताबो से आये है किताबो में चले जायेंगे जैसे राम को बहकाया है वैसे ही इनको बहकायेंगे बस, कुर्सी सलामत रहे […]
काव्यभाषा
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