जख्म इतने हैं मेरे दिल मे, कि कलम मेरी खून उगलती है! पर उन लोगों से अच्छी है, जिनकी पसन्द रोज बदलती है!! जो धोखाधड़ी का जाल बुनकर, ठग लेते हैं भावनाओ को! उनसे तो भली कलम मेरी, जो हर मुद्दे पर फिर संभलती है!! झूठ फरेब के बिछाते है, […]
काव्यभाषा
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