अशांति दुख अगर है समाधान उसका कीजिए क्यो हुआ, कैसे हुआ कारण कुछ न दीजिए कारण नही ,निवारण खोजो अशांति दुख को दूर भेजो शांति खुशी सबको मिले ऐसी राह का मार्ग तो खोजो मन,वचन,कर्म से रहो एक समान स्नेह,सहयोग के लेप से दिव्य हो हर समाधान हर परीक्षा में […]

नए-नए साल में, नई-नई कविताएँ होंगी नए-नए पुष्प होंगे, नई-नई  लताएं होंगी नई-नई रुत होगी, नई-नई फिजांए होंगी नए-नए मंच होंगे, नई-नई  कलाएं होंगी नई-नई कहानियाँ, नई-नई कथाएँ होंगी नए-नए तराने होंगे, नई ही गाथाएँ होंगी नया साहित्य होगा, नई-नई विधाएं होंगी नए-नए अंदाज होंगे, नई ही अदाएं होंगी नए […]

नहीं मोहताज मेरे जीवन का उजाला किसी दीपक का किसी सूरज का किसी रोशनी का जो चमकता है अपनी प्रतिभा से अपने ही नूर से जो चमकता है अंधेरे में भी मुझे उजाला नहीं मिला विरासत में मुझे उजाला नहीं मिला राजभवनों से मुझे उजाला नहीं मिला धर्म-स्थलों से मुझे […]

मां ने अपने दोनों बेटों का पालन-पोषण बङे ही लाड- चाव से किया उनको पढाया-लिखाया काबिल बनाया और वे अब शायद मां से भी बङे हो गए आज वे दोनों अलग हो गए घर के बीचोंबीच दीवार बन गई घर का सारा सामान बांट लिया कोशिश की आखिर उन्होंने अपनी […]

मैं आज सुबह उठा और देखा रात की बूंदाबांदी से जम गई थी धूल वायुमंडल में व्याप्त रहने वाले धूलकण भी थे नदारद मन हुआ खुश देखकर यह सब कुछ देर बाद उठाकर देखा अख़बार तो जल रहा था वतन साम्प्रदायिकता व जातिवाद की आग में यह बरसात नहीं कर […]

आदिकाल में रहा जंगलों में आदमी करता रहा झुंड बनाकर पशुओं का शिकार आज का आदमी कहलाता है सभ्य करता है शिकार आदमी का होता है शिकार आदमी का खो गए झुंड आधुनिकता की चकाचौंध में हो गया आदमी भीड़ में भी अकेला #विनोद सिल्ला   जीवन परिचय   विनोद […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।