4

पायल,दिव्य पद कमल वे दिव्य-देवी प्रमान् की। जानकी हर ली दशानन बाजी लगादी जान की। हाः राम,हाः लषन, वीर हर ली ये रावण पातकी। मानी न, आन लषन की दोषी बनी निज जानकी। क्रोधित जटायू भिड़ रहा ले जाने न दे माँ जानकी। जानकी हित ‘पर’कटाये परवाह नहीं की जान […]

आओ कविता-गीत लिखें हम, दिल का मधु संगीत लिखें हम। तोड़ जगत की दीवारों को, अमन प्रीत नई रीत लिखें हम। गैर-पराया,सब अपनों को, जाने-अनजाने,सपनों को, सृष्टि के कतरे-कतरे को, नया भोर,नव मीत लिखें हम। आओ कविता-गीत लिखें हम॥ पल दो पल के मेहमां होकर, जी लें जीवन रहमां होकर, […]

हे शारदे मां,शारदे मां, ज्ञान का भण्डार दे मां। विमल वाणी विद्या वरणी, हस्त पुस्तक माला धरणी। श्वेत वस्त्र वंदिता मां, बुद्धि का उपहार दे मां। शारदे मां शारदे मां, ज्ञान का भंडार दे मां। ध्यान और विज्ञान दे मां, सबको सन्मति ज्ञान दे मां। सारे जग के जीवो को […]

पिया मिलन को आतुर नैनों, सृष्टि के कण-कण को देखो। प्राण प्रिय ‘वो’ पिया दिखेंगे, जरा ठहर धड़कन को देखो। सर-सर बहती हवा सुहानी, केवल गाती उसकी कहानी। कान लगाकर सुनो गौर से, हवा के मन, कम्पन को देखो। पिया मिलन को आतुर नैनों, सृष्टि के कण-कण को देखो॥ मंथर-मंथर […]

जीवन के बेगाने गाने, गुनगुनाता,आगे बढ़ता जाता हूं। मुस्काता हूं,सावन को मुठ्ठी में भरकर, चलता हूं,फिर गाता हूं॥ सकारात्मक चिंतन संभव, पूरे होते मानव के अभीष्ट सभी। सत्यम्,शिवम्,सुन्दरम् और, प्रसन्न होते ईष्ट सभी॥ मैं उठता हूं अपने पैरों, सुमनों को जल दे आता हूं। मुस्काता हूं,सावन को मुठ्ठी में भरकर, […]

पचपन में भी, बचपन का मन जिंदा रहना चाहिए। आसमान के हर कोने में, पंख सुनहरे सपनों वाला परिंदा रहना चाहिए॥ सौ सुनहरे तारों पर भी, आसमां में सबका मनहर चंदा रहना चाहिए। सागर की सौ लहरें फिर भी जीवन हर पल जिंदा रहना चाहिए॥ अल्हड़पन और मस्ती खातिर, दिल […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।