चिंतन न कर हे मानव!

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himanshu mitra

परिदृश्य परिवर्तित हो गया इसका,

जिसकी अठखेलियों का

सम्मोहन कभी सूर्य की किरणों को
अल्पकालीन निद्रा में डुबा देता था।

जिसके आगमन पर चंद्र
भी बादलों का आवरण हटा देता था,
जिसका एहसास मात्र दोहरे शुष्क नयनों को नम कर देता था..
जिसका अवलोकन मात्र ही ह्रदय आघात को कम कर देता था।
निश्चित ही ये वही है,जिसकी गोद में बैठकर पक्षी कलरव करते थे।
जिसके सान्निध्य में  रहकर घुमक्कड़
मूर्तियों में रंग को भरते थे
जिसके एक सूक्ष्म दृश्य से चौपालों का
शून्यकाल संतृप्ति में आ जाता था।

उसके आते ही मौसम का रुप
परिवर्तित हो जाता था,
पर शायद उसमें अब  वो बात नहीं,
दिन तो ढलता है पर उसके आगे चाँदनी रात नहीं,
निर्रथक समय संयोजित हो जाता है..
मौसम का रंग भी परिवर्तित हो जाता है।

पर चौपालों का शून्यचक्र नहीं बढ़ता,
ये पवन भी शाखों का रुप नहीं  गढ़ता..

चिंतन न कर हे मानव!
ये तेरी ही परिकल्पनाओं का परिणाम है,
गति देना चाहता था तू जिस जीवन को

आज उस पर ही अल्पविराम है।
समय शेष है अब भी तू अपनी
नगण्य चेष्टाओं को संकुचित कर ले,
बर्हिगमन कर स्वार्थ का अपनी
शिराओं से प्रकृति प्रेम के रक्त को भर ले॥

                                                  #हिमांशु मित्रा

परिचय: हिमांशु मित्रा उत्तरप्रदेश राज्य के शिवपुरी (लखीमपुर खीरी) में रहते हैंl आपकी उम्र २० वर्ष तथा स्नातक उत्तीर्ण हैंl आप हिन्दी में लिखने का शौक रखते हैंl  

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।