फ़ौजी की राखी

Read Time0Seconds

1बहना इसकी बाट जोहे, ये कब राखी पर घर आता है!
तीज त्यौहार सब हुए बेगाने, कब रक्षाबंधन मनाता है!!
माथे पर मेरे भी हो तिलक, और मुँह में मेरे मिठाई हो!
राखी बांधे बहना मेरी भी, सूनी ना कभी मेरी कलाई हो!
परिवार के बीच रह पाऊं, हर त्यौहार की भी बधाई हो!
मन इसका भी तो ये सोचे, कभी ना कोई रुसवाई हो!
सपनों में ही सोचकर ये सब, बस ये फ़ौजी सो जाता है!
बहना इसकी बात जोहे ये कब राखी पर घर आता है!!

देखकर अपनी सुनी कलाई, दिल इसका भी तो रोता है!
सीमा की हलचल झेल, देश मे बीज शांति का बोता है!
दुश्मन के आगे डटा रहे, ये कब नींद चैन की सोता है!
बस इतना ही काफी नही, ये अपनी जान भी खोता है!
मौन रहकर सब सहता ये, इसका ना दिल बैठा जाता है!
बहना इसकी बाट जोहे, ये कब राखी पर घर आता है!!

और कुछ कर ना पाएं, तो निकले दुआ हमारे दिलों से!
जान इनकी रखना सलामत, सामने खड़े कातिलों से!
आपस मे प्यार बना रहे, दूर रहे ये हर शिकवे गिलो से!
हार का ना मुँह देखे कभी, लौटें जीतकर हर किलों से!
अपना मन रखने को ये, कईबार खुद से भी बतियाता है!
बहना इसकी बाट जोहे ये कब राखी पर घर आता है!!

सुषमा मलिक “अदब”
रोहतक (हरियाणा)

0 0

matruadmin

Next Post

एक सशक्त व गौरव शाली भारत का आधार बनेगा श्री राम मंदिर: डॉ सुरेन्द्र जैन

Sat Aug 1 , 2020
नई दिल्ली | विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने कहा है कि राम मंदिर का भूमि पूजन देश के लिए एक परम गौरवशाली क्षण है। इस राष्ट्रीय गौरव को कोई धूमिल नहीं कर सकता है। 492 वर्ष पूर्व श्री राम जन्मभूमि पर एक विदेशी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।