खून का रंग लाल अच्छा नहीं लगता हो रहा जो बवाल अच्छा नहीं लगता आएंगे अब अच्छे दिन, बात पुरानी है जहन में ये खयाल अच्छा नहीं लगता बिक रहा जिधर देखो मौत का सामान ढोल नगाड़े गुलाल अच्छा नहीं लगता बिछाया है किसी ने गरीबों को फंसाने हकीकत यही […]

अब अहित सोचना बंद करो कुछ तो ऊपर वाले से डरो सबकी भलाई की बात करो अच्छे जज्बात अपने करो अच्छाई ही सबके साथ जाएगी बुराई किसी काम नही आएगी समय की कीमत को पहचानो सद्कर्म जीवन में अपना लो किसी को दे सको तो खुशी दो अपनत्व समान मजबूती […]

अखिल भारतीय साहित्य मंथन शोध संस्थान एवं के.बी.एस. प्रकाशन दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 17 अप्रैल 2021 को कोलकाता, पश्चिमी बंगाल में आयोजित सम्मान समारोह में भिवानी के युवा एडवोकेट डॉ. नरेश सिहाग को साहित्य, शिक्षा, पत्रकारिता एवं शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए साहित्य मंथन कलमयोद्धा […]

चढ़ी धूप है ताप की त्रस्त हुए है जीव। चाह करत हैं छांव की, सकल धरा के जीव। सज्जन थोड़ा कष्ट कर, एक पात्र ले नीर। प्यासे तडफें जीव सुन, होते बड़े अधीर।। बूंद बूंद है कीमती, रखो नीर का ख्याल। नीर करो बर्बाद मत, जग होगा बेहाल। जीवन जलसम […]

गीत कविता लेख आदि मोहब्बत पर लिखता रहा। और लोगों की हंसी का पात्र मैं बनता रहा। क्योंकि वो लोग हमें पागल जो समझते थे? इसलिए मेरी लेखनी पर वो हमेशा हँसते थे। पर जब मेरे मोहब्बत के एक छोटे से पैग़ाम ने। लोगों को मोहब्बत करना और निभाना सिखा […]

जब लाईलाज थे तब संभल गए अब ईलाज है फिर भी फ़िसल गए इसमे कोई दोष नही महामारी का दिवाला निकला है समझदारी का छूट क्या मिली बेपरवाह हो गए कोरोना को डरा खुद हव्वा हो गए न मास्क पहना,न दो गज की दूरी जिंदगी दांव पर लग गई पूरी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।