Author Archives: matruadmin - Page 2

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रोटी को अमेरिका-जापान घुमाया जाता है

रोटी को भी बहलाया फुसलाया जाता है जब आग के दामन से उसे बचाया जाता है रोटी प्रजातंत्र का बहुत शातिर खिलाड़ी है तभी तो इसे भरे पेट में खिलाया…
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कवि हो तुम

गौर से देखा उसने मुझे और कहा लगता है कवि हो तुम नश्तर सी चुभती हैं तुम्हारी बातें लेकिन सही हो तुम कहते हो कि सुकून है मुझे पर रुह…
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हजार ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले

निकलना खुल्द से आदम का सुनते आए है ग़ालिब ...बहुत बेआबरू होकर तेरे कुचे से हम निकले ...ग़ालिब की यह पक्ति रेत में मोती की मानिंद लगती है ...जिंदगी की…
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मेरा ये सवाल है

मन में विचारों के द्वन्द्व से, प्रतिशोध या प्रतिद्वन्द्व से क्यों हृदय में उछाल है, मेरा ये सवाल है- मेरा ये सवाल है। कोई नहीं मिलता किसी से, हर वक़्त…
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सुख

अहित करे जो किसी का हितकारी नही होता है नकारात्मक रहता है जो सुख उसे नही मिलता है पूतना,मंथरा ,होलिका यशविहीन रही सदा जिनका अहित सोचा उन्होने श्रेष्ठ बनकर रहे…
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सफ़ेद चादर पे सोने के सिक्के

सफ़ेद चादर पे सोने के सिक्के सफेद पहाड़ों की सर्द वादियों में तीखे नुकीले अकड़े से खड़े हरे पेड़ कोहरे की सफेद चादर और दूर टीले पे मेरा छोटा सा…
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