गैर तो गैर,अपने भी अपने न हुए, जो जने थे अपने पेट से अपने न हुए। क्या हाल सुनाऊं अपने दिल का,ये टूटा हुआ। लिखा था जो मेरे भाग्य मे, वह भी फूटा हुआ।। जो कभी सोचा था मैंने, वे पूरे सपने न हुए। गैर तो गैर,अपने भी अपने न […]

खुद एक चांद हो तो क्यों पूर्णिमा इंतजार करे। और मोहब्बत का इसी रात में होकर मदहोश हम आंनद ले।। तुम जैसे दोस्त से यदि मोहब्बत हो जाये। तो हमें सीधी सीधी जन्नत मिल जाये।। डूब चुका था प्यार के सागर में, और नश नश में मोहब्बत भर गया था। […]

अंग्रेजी का दामन छोड़ो अब हिंदी की जय बोलो हिंदी अब गुलाम नही है किसी की मोहताज नही है सत्ताधीशों तुम भी बोलो हिंदी देश की शान बनेगी भारत की पहचान बनेगी संसद में सब हिंदी बोलो अपनी मातृभाषा में बोलो स्वदेशी भाषा से नाता जोड़ो हिंदी से अब मुहं […]

जब तक न आवे कोई दवाई, तब तक न करे कोई ढिलाई। दो गज की रकखो सबसे दूरी, कोरोना से ये बचाव है जरूरी। मास्क अपने मुंह पर तुम लगाओ, कोरोना को तुम अब दूर भगाओ। साबुन से धोओ मल कर तुम हाथ मिलाओ न किसी से भी तुम हाथ […]

मध्य प्रदेश के आगर जिले की नलखेड़ा तहसील जिसकी पहचान पांडव कालिन पीताम्बरा सिद्ध पीठ मॉ बगलामुखी का मंदिर के कारण है। विश्व प्रसिद्ध पीताम्बरा सिद्ध पीठ मॉ बगलामुखी का यह मंदिर शक्ति एवं शक्तिमान के सम्मिलीत प्रभाव से युक्त है। यहॉ पर की जाने वाली साधना आराधना अनंत गुना […]

इस बार रावण दशहरे पर आया, राम से बोला और वह चिल्लाया। पहले अपने मुख पर मास्क लगाओ, फिर आकर मुझ पर आकर बाण चलाओ।। कोरोना काल है,मेरी भी है मजबूरी, मुझसे रक्खो सब दो गज की दूरी। मेरे निकट जो भी कोई आ जायेगा, काल का ग्रास वह एक […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।