किसी का क्या जो कदमो पर जबी ए बंदगी रख दी हमारी चीज थी हमने जहाँ जानी वहां रख दी / जो दिल माँगा तो वो बोले ठहरो याद करने दो / जरा सी चीज थी हमने न जाने कहाँ रख दी /1/ तुम्हे अब भूल जाये तो अच्छा है […]

सत्य की जीत जश्न विजयादशमी के नाम वक्त ऐसे बिताओ तुम भी ज़िन्दगी के नाम जब जमीं पाप सह ना सकी अवतार आए अंत असुर का हुआ यहाँ शक्ति देवी के नाम है वतन एक यही जहाँ नारी पूजे जाते पुण्य नवरात्र अष्टमी कुँवारी के नाम आस्था और जश्न आत्मा की शुद्धता में हो रहा आँख बाँधकर क्या पट्टी के नाम ख़ून पीना कहाँ कहा है वैदिक किताब नर संहार ना कभी हो पशुबलि भगवती के नाम भूलकर भी असत्य को ना महमान बनाओ दूध कब से पसंद हो हंस को पानी के नाम क्यों लगा पहले नाम के आगे ‘श्री’लंका में वैदेही राम संग जनक नन्दिनी के नाम नाम:राजीव कुमार दास पता: हज़ारीबाग़ (झारखंड)  सम्मान:डा.अंबेडकर फ़ेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान २०१६ गौतम बुद्धा फ़ेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान २०१७ पी.वी.एस.एंटरप्राइज सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान १४/१२/२०१७ शीर्षक साहित्य परिषद:दैनिक श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान १५/१२/२०१७ काव्योदय:सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान:०१/०१/२०१८,०२/०१/२०१८,०३/०१/२०१८३०/०१/२०१८,०८/०५/२०१८ आग़ाज़:सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान:२५/०१/२०१८ एशियाई […]

मुझको युद्ध नही विराम पसन्द है, मुझको संघार नही सृंगार पसन्द है, लेकिन दूषित कर दे जो मेरे तन मन को, तब केवल और केवल परशुराम पसन्द है, मुझको तो दुर्गम अनुसंधान पसन्द है, मुझको केवल स्वेत परिधान पसन्द है, लेकिन लहू से लतपत लालित होजाऊँ, तो मुझको शत्रुओं का […]

कल मैं बैठा – बैठा सोच रहा था , क्या लिखू विजया दशमी है कल । क्या लिखू श्री राम पर और अब , क्या लिखू रावण द्वारा किए छल ।। हमसब मिलकर दशहरा मनाते है  , और रावण के पुतले को जलाते है । आजकल राम के रूप में […]

करवाचौथ के दिन पत्नी सज धज के पति का इंतजार कर रही शाम को घर आएंगे तो छत पर जाकर चलनी में चाँद /पति का चेहरा देखूँगी ।पत्नी ने गेहूँ की कोठी मे से धीरे से चलनी निकाल कर छत पर रख दी थी । चूँकि गांव में पर्दा प्रथा […]

सदियो से जलाते आ रहे है फिर भी नही जल रहा यह रावण पुतला जलाने से क्या होगा असल मे तो कभी जलाइये रावण रावण तो हम सबके अंदर है अंदर से तो भगाइये अपने रावण रावण तो नाम बुराइयों का है बुराइयों को भगा मिटाइये रावण राम विजय असल […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।