Archives for काव्यभाषा - Page 2

Uncategorized

मानवता की खिल्ली को

(भूख से मरी वो दोनों बच्चियां मुझे सोने नहीं दे रहीं रोज रात को आकर वो मुझसे खाना मांगती हैं रोटी दिखाते ही वो हँसकर लौट जाती हैं । अगर…
Continue Reading
Uncategorized

अकर्मण्यता

ये तुम्हारी जड़ता तुम्हारी अकर्मण्यता एक दिन उत्तरदायी होंगी तुम्हारे ह्रास का और कठघरे में खड़ी होंगी और जवाब देंगी सृष्टि के विनाश का परिस्थतियाँ खुद नहीं बदल जाती हैं…
Continue Reading
Uncategorized

कुधर नकलची

इधर नकलची उधर नकलची, नहीं हैं बोलो किधर नकलची? कवि ख़ुद को वह लिखते लेकिन, हैं सचमुच वे कुधर नकलची मंचों पर सम्मान मिले तो, हँसें खोलकर अधर नकलची! बड़े-बड़े…
Continue Reading
Uncategorized

दिल

दिल तुझ पे हम अपना हार बैठे। सागर में कसती..... उतार बैठे। हसरतों को दी जब उड़ान हम ने। सारी हदें हम अपनी  भुला बैठे। मिलता है प्यार नसीबों से…
Continue Reading
Uncategorized

श्रद्धा सुमन

श्रद्धांजलि दिवंगत मित्र एस एस सैनी को क्या हुआ ,कैसे हुआ क्यो तुम चले गए कुछ तो बताया होता बिन बताये ही चले गए थे चेहते बहुतो के तुम फिर…
Continue Reading
Uncategorized

है बाज़ार बहुत गर्म दरिंदगी का

तुम लेके आओ भीड़,मैं मुँह मोड़ लेता हूँ इंसानियत से अब हर रिश्ता तोड़ लेता हूँ जानवरों के लिए इंसानों की अब बलि दो इतिहास के पन्नों में ये क़िस्सा…
Continue Reading

मातृभाषा को पसंद कर शेयर कर सकते है