Archives for काव्यभाषा - Page 2

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बारिश*

*जैसे ही आसमान में घनघोर घटा छायी, बिजली कड़क ने लगी, बादल भी अपने बरसने के पूरे मूड़ में आ गया और श्वेत से श्याम रंग धारण किया वैसे ही…
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“दहेज”

दहेज मांगकर हम ये कर रहे हैं, ना खुद जी रहे!ना मर ही रहे हैं, सभी जानते!अभिशाप है ये, जो माफ न हो!वो पाप है ये, इस आग में बहुत…
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ज़ख़्म

कोई भी ज़ख़्म दिल को खटकता नहीं है अब । आँसू भी चश्म में मेरे चुभता नहीं है अब । इस हद अकेला हो गया मैं कि पूछ मत ।…
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सूखे दरख़्त का ठूँठ

मैं  वो  सूखे  दरख़्त  का  ठूँठ  हूं, जो  औरों  के बहुत काम आया । पड़ा   हूं  आज  मैं  बीच  राह  में, ठोकरों का सिर पे इल्जाम आया। जब  तक…
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सो जाऊँ*

आज नहीं  मन पढ़ने का, आज नहीं,मन लिखने का। मन विद्रोही,निर्मम  दुनिया, मन की पीड़ा किसे बताऊँ, माँ के आँचल में सो जाऊँ। मन में कई तूफान मचलते, घट मे…
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 कयामत

अखबार टीवी के लिए तो बस एक खबर होती है पूछो उसके दिल से हाल उसका जिस पर यह कयामत गुजर होती है । मीडिया को मिल जाता है एक…
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