हिंदी लेख माला के अंतर्गत डॉ. वेदप्रताप वैदिक आज 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। पहली बार यह 1975 में नागपुर में हुआ था। इसका आयोजन श्री अनंत गोपाल शेबड़े और श्री लल्लन प्रसाद व्यास ने किया था। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। उस […]

डॉ क्टर थे वो कलम से शब्दों कि चिकित्सा करते थे। वे अपनी कलम से हर बात खुलकर लिखते थे। द बंग पत्रकार एसे,लोग उन्हें लेखन का योद्धा कहते थे। प्र श्न कोई भी करले उनसे, बेबाक जवाब देते थे। ता रणहार बने हिन्दी आंदोलन के हिन्दी भाषा को मान […]

हिन्दी लेख माला के अंतर्गत डॉ. वेदप्रताप वैदिक हमारे नेता जिस दिन नौकरशाहों के वर्चस्व से मुक्त होंगे, उसी दिन हिंदी को उसका उचित स्थान मिल जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सात-आठ वर्षों में न जाने कितनी बार अपने ‘मन की बात’ आकाशवाणी से प्रसारित की है। विपक्षी दलों […]

यदि आप कविता लिखते हैं तो मातृभाषा डॉट कॉम लाया है आपके लिए कविता लेखन प्रतियोगिता। विशेष कविता प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है, जिसमें आप जलियांवाला बाग या उससे जुड़े विषय पर अपनी कविता लिखकर भेज सकते हैं, जिसका प्रकाशन मातृभाषा डॉट कॉम पर होगा। जलियांवाला बाग नरसंहार को […]

लघुकथा कम शब्दों में महत्वपूर्ण बात कहने की विधा- डॉ मंगल इंदौर। लघुकथा कम शब्दों में महत्वपूर्ण बात कहने की विधा है। लघुकथाकार गागर में सागर भरने में सक्षम होता है। यह बात वरिष्ठ शिक्षाविद और ऑल इंडिया कॉमर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. रमेश मंगल ने कही। डाॅ. मंगल […]

हिन्दी लेख माला के अंतर्गत डॉ. वेदप्रताप वैदिक हिन्दी को लेकर तमिलनाडू में फिर बवाल मच सकता है। केरल तथा कुछ अन्य प्रांतों में उनके राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों में पहले से भिड़ंत हो रही है। उस भिड़ंत का मुद्दा है— विश्वविद्यालयों के उप-कुलपतियों की नियुक्ति लेकिन तमिलनाडू में मुद्दा यह […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।